Modi Cabinet Expansion: मानसून सत्र से पहले बड़ा फेरबदल! कई दिग्गजों की होगी छुट्टी, इन नए चेहरों की चमकेगी किस्मत

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। सरकार अपने मंत्रिमंडल में एक बहुत बड़े और व्यापक फेरबदल की तैयारी में है। सियासी हलकों में बेहद पुख्ता सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों के भीतर मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। इस महा-विस्तार में जहां कई नए और चौंकाने वाले चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिल सकती है, वहीं खराब परफॉर्मेंस या संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी होना भी लगभग तय माना जा रहा है।

 

चुनावी राज्यों पर फोकस, तैयार हो रहा है सियासी रोडमैप

इस संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच बैठकों का दौर जारी है और इसका पूरा रोडमैप तैयार कर लिया गया है। इस बार के फेरबदल का मुख्य फोकस उन राज्यों पर रहने वाला है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे बेहद महत्वपूर्ण राज्यों का प्रतिनिधित्व कैबिनेट में बढ़ाने जा रही है।

 

तारीखों की बात करें तो 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई अहम कार्यक्रम और विदेशी दौरे पहले से तय हैं। वहीं, संसद का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री इस सत्र की शुरुआत से ठीक पहले अपने नए सहयोगियों को शपथ दिला सकते हैं ताकि विपक्ष के सामने एक नई और मजबूत टीम के साथ उतरा जा सके।

 

जातीय समीकरण और ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का फॉर्मूला

देश की सियासत में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर किन मंत्रियों की कुर्सी खतरे में है। भाजपा के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के कड़े सिद्धांत के तहत उत्तर प्रदेश के पंकज चौधरी और दिल्ली के हर्ष मल्होत्रा को संगठन में प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है, जिसके चलते इन दोनों ही नेताओं की कैबिनेट से विदाई तय मानी जा रही है। इसके अलावा केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन पहले ही मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है।

 

वर्तमान में मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में कुल 72 मंत्री शामिल हैं, जिनमें 31 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री हैं। नियमों के मुताबिक, केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं, जिसका मतलब है कि इस वक्त भी सीधे तौर पर 13 पद खाली चल रहे हैं। भाजपा इस खाली जगह को क्षेत्रीय, राज्यवार और जातीय संतुलन साधने के लिए इस्तेमाल करेगी।

 

यूपी से लेकर पंजाब तक दिखेगा नए मंत्रियों का दबदबा

उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा रण को फतह करने के लिए इस कैबिनेट विस्तार का सबसे ज्यादा असर यूपी कोटे पर दिखेगा। वर्तमान में सूबे से प्रधानमंत्री सहित 10 मंत्री हैं। सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव के बाद बदले सामाजिक समीकरणों को ठीक करने के लिए पश्चिमी यूपी को इस बार मोदी कैबिनेट में भारी प्रतिनिधित्व मिल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ का ध्यान इस क्षेत्र पर विशेष रूप से केंद्रित है। यहां से ओबीसी और दलित समुदाय के कुछ नए चेहरों को लाल बत्ती मिलना तय है।

 

वहीं, उत्तराखंड की बात करें तो दलित चेहरे के रूप में स्थापित अजय टम्टा, जो फिलहाल परिवहन राज्य मंत्री हैं, का कद बढ़ाया जा सकता है या फिर राज्य से किसी अन्य युवा चेहरे को मौका मिल सकता है। पंजाब, जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां से भी सिखों और अन्य वर्गों को साधने के लिए 2 से 3 नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए कुछ राज्यसभा सदस्यों के नामों पर भी इस समय गंभीरता से विचार चल रहा है।

बागी और क्षेत्रीय क्षत्रपों को साधने की बड़ी रणनीति

इस बार के फेरबदल में केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों और विपक्षी खेमे में सेंधमारी करने वाले नेताओं को भी बड़ा इनाम मिल सकता है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) में विलय किया है और वे मोदी सरकार को समर्थन दे रहे हैं। चर्चा तेज है कि इन बागी सांसदों में से एक या दो को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह दी जा सकती है।

 

महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ आ चुके हैं। शिंदे गुट की इस बढ़ती ताकत को देखते हुए उनके कोटे से मंत्रियों की संख्या एक से बढ़कर तीन हो सकती है। इसके अलावा बिहार की राजनीति में आए ऐतिहासिक मोड़ के बाद, जहां नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं, नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने के बाद केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की अटकलें बेहद तेज हो चुकी हैं।

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