नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत 115 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र (Letter to PM Modi) लिखा है, जिसमें दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने और स्थायी शांति स्थापित करने का आह्वान किया गया है। इस पत्र में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत कई भारतीय नेताओं और सामाजिक व्यक्तित्वों ने पाकिस्तान के साथ संवाद को जरूरी बताया है।
महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?
महबूबा मुफ्ती ने इस मामले में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पास यह सुनहरा अवसर है कि वे पाकिस्तान के साथ बातचीत कर क्षेत्र में स्थिरता ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि RSS के वरिष्ठ नेताओं जैसे दत्तात्रेय होसबोले और मोहन भागवत ने भी पाकिस्तान के साथ बातचीत की जरूरत पर बल दिया है। मुफ्ती ने वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन “आप दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं” को दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुधार से पूरे दक्षिण और मध्य एशिया का जुड़ाव संभव है। उन्होंने सीमा पर बातचीत, सीमाएं खोलने और शांति का पुल बनाने का सुझाव दिया।
पत्र में किन लोगों के नाम हैं?
यह अपील ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ द्वारा जारी की गई है, जिसमें भारत से 61 और पाकिस्तान से 56 हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, पूर्व उपप्रधानमंत्री मीरवाइज उमर फारूक, महबूबा मुफ्ती, राजद सांसद मनोज झा, पूर्व टीएमसी मंत्री हुमायूं कबीर जैसे नेता शामिल हैं। पाकिस्तान से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व विदेश सचिव अशरफ जहांगीर काजी, परमाणु भौतिक विज्ञानी परवेज हुदभोय भी इस अपील पर हस्ताक्षर करने वालों में हैं।
अपील का मुख्य उद्देश्य और क्या है?
यह पत्र दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही शत्रुता को खत्म करने, व्यापक द्विपक्षीय संवाद फिर से शुरू करने, व्यापार संबंधों को पुनः स्थापित करने, सीमाएं खोलने और सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थलों की यात्रा आसान बनाने पर केंद्रित है। इसमें कहा गया है कि दोनों देशों का संयुक्त मानव समुदाय लगभग एक-पांचवां है, और उनके युवाओं को अवसर और सुरक्षा का अधिकार है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों को पुनः नियुक्त करने, सामान्य वीजा सेवाएं शुरू करने, व्यापार, यातायात, और सीमा पार यात्रा को सामान्य बनाने की भी अपील की है।
क्या हैं प्रमुख सुझाव?
पूर्ण राजनयिक संबंधों की बहाली
उच्चायुक्तों की पुनः नियुक्ति
सामान्य वीजा सेवाओं और सीमा पार यात्रा को फिर से शुरू करना
अटारी-वाघा सीमा और करतारपुर कॉरिडोर खोलना
व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत बनाना
हवाई मार्ग खोलना और सीमा पर सुरक्षा को कम करना
श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए धार्मिक स्थलों की यात्रा आसान बनाना
पत्र में अन्य आग्रह:
द्विपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाना
सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक चर्चा
सुरक्षा चिंताओं का समाधान
सांस्कृतिक और धार्मिक यात्राओं का सहज संचालन
मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रतिबंध हटाना
क्या बोले हस्ताक्षरकर्ता?
हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि दशकों से कायम दुश्मनी लाखों युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल रही है। वे दोनों देशों में मित्रता और सहयोग के मार्ग पर चलने का आह्वान कर रहे हैं। उनका कहना है कि संवाद और मेलजोल ही स्थायी शांति का मार्ग है, न कि टकराव और अलगाव।
यह अपील किसी राजनीतिक रुख का समर्थन नहीं है, बल्कि मानवता की भलाई और साझा भविष्य की दिशा में एक प्रयास है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने दोनों देशों के नेताओं से क्षेत्र में स्थिरता और विकास के लिए कदम उठाने का आह्वान किया है, ताकि दक्षिण एशिया का भविष्य बंटवारे और संघर्ष से नहीं, बल्कि शांति और समृद्धि से तय हो।
यह पत्र भारत और पाकिस्तान के करीब दो अरब लोगों के हित में है, जो बेहतर भविष्य के लिए आशा और भरोसे का संदेश प्रस्तुत करता है।
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