आज ही के दिन शुरू की गई थी दबे-कुचले, शोषित और अल्पसंख्यकों के लिए लड़ाई : लालू यादव

पटना : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू यादव ने पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यकर्ताओं के नाम संदेश जारी करते हुए कहा कि राजद केवल चुनाव लड़ने वाला राजनीतिक दल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से सामाजिक सरोकारों के साथ निरंतर जुड़े रहने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

 

सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में लालू यादव ने कहा कि 05 जुलाई का दिन उनके लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन अनेक वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर गरीबों, शोषितों, दबे-कुचले वर्गों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि बिहार में सामाजिक और आर्थिक असमानता को समाप्त करने के उद्देश्य से राजद के हजारों कार्यकर्ताओं ने त्याग और बलिदान की मिसाल कायम की है। पार्टी का आज जो स्वरूप है, वह समर्पित कार्यकर्ताओं के खून-पसीने और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने सभी समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को नमन करते हुए उनके योगदान की सराहना की।

 

लालू यादव ने कहा कि राजद की राजनीति हमेशा सामाजिक और आर्थिक गैरबराबरी के खिलाफ रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का विकास मॉडल केवल हवाई अड्डों, बड़े मॉल और आलीशान होटलों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना उसका मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब गरीब और वंचित वर्गों की उसमें समान भागीदारी सुनिश्चित हो।

 

लालू यादव ने कहा कि राजद ने सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में व्याप्त असमानताओं के खिलाफ लगातार संघर्ष करते हुए लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने का प्रयास किया है। समाजवादी विचारधारा के पुरोधाओं डॉ. राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर और डॉ. भीमराव अंबेडकर के मूल्यों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता पहले से अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य वंचित समाज के आर्थिक और मनोवैज्ञानिक सशक्तीकरण की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाना है।

 

राजद अध्यक्ष ने देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक और जनवादी विचारधारा वाले दलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण, पूंजी के प्रभाव, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त और दक्षिणपंथी राजनीति के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। उनके अनुसार पिछड़ों की भागीदारी, शिक्षा, रोजगार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को अन्य राजनीतिक विमर्शों के पीछे धकेला जा रहा है।

 

राजद प्रमुख ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि वे यह समझें कि राजद केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं है। पार्टी को अपने समर्थक वर्गों, सामाजिक संगठनों और प्रगतिशील समूहों के साथ लगातार संवाद बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि राजद संसद से लेकर सड़क तक जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने में सक्षम है और आगे भी सामाजिक न्याय तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

 

उल्लेखनीय है कि राजद ने 01 जुलाई को पटना में अपना स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया था। पार्टी अपने 29 वर्ष पूरे कर 30वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। ———–

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