‘राम मंदिर चढ़ावा चोरी’ पर यूपी में महासंग्राम : बीजेपी बोली- आरोपी टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच हुई कई बार फोन पर बात

अयोध्या। अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में कथित गबन और चढ़ावा चोरी के मामले ने अब एक बेहद गंभीर राजनीतिक रूप ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव पर सीधे और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

 

वहीं, दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी मोर्चा खोलते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच अधिकारी को पत्र लिखकर उनके दावों की जांच की मांग की है।

 

बीजेपी का बड़ा दावा: अखिलेश और मुख्य आरोपी टिन्नू यादव में ‘फोन कनेक्शन’

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि राम मंदिर गबन मामले के आरोपियों में शामिल रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से कई बार फोन पर बातचीत हुई थी।

 

अजय आलोक ने सपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी की हकीकत अब धीरे-धीरे देश के सामने आ रही है। जांच में यह बात खुलकर आ रही है कि टिन्नू यादव लगातार अखिलेश यादव के संपर्क में था और दोनों के बीच कई बार फोन पर बात हुई। जैसे-जैसे इस चोरी और गबन मामले की परतें खुलेंगी, जनता के सामने यह साफ हो जाएगा कि इस पूरी साजिश के पीछे कौन से बड़े चेहरे थे।” उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सपा पहले भी संतों-महात्माओं के आक्रोश को नहीं झेल पाई थी और आगे भी नहीं झेल पाएगी।

 

अजय आलोक ने कहा- “दिखाएं रसीद, ब्याज समेत लौटाएंगे दान”

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर भी तीखा हमला बोला और उन्हें ‘राम विरोधी’ करार दिया। दरअसल, दिग्विजय सिंह ने एक ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ के दौरान कहा था कि वे राम मंदिर चंदे में अनियमितताओं को लेकर कोर्ट जाएंगे और गड़बड़ी साबित होने पर अपना दान ब्याज सहित वापस मांगकर किसी अन्य धार्मिक ट्रस्ट या शंकराचार्य को दे देंगे।

 

इस पर पलटवार करते हुए अजय आलोक ने कहा, “उन्हें शर्म आनी चाहिए कि वे भगवान राम को दिया दान वापस मांग रहे हैं। वे पहले दान की रसीद दिखाएं और उसे अखबारों में छपवाएं, राम मंदिर ट्रस्ट उन्हें ब्याज सहित पैसा वापस कर देगा। ऐसे नास्तिकों का दान भगवान राम के चरणों तक नहीं पहुंचना चाहिए।” हालांकि, दिग्विजय सिंह ने खुद को सनातन परंपरा का सच्चा अनुयायी बताते हुए कहा कि वे नियमित अनुष्ठान करते हैं और नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके हैं।

 

वीएचपी ने प्रियंका, केजरीवाल और संजय सिंह से पूछताछ की मांग की

इस पूरे विवाद के बीच, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने मामले की जांच कर रहे अधिकारी को एक पत्र लिखकर हलचल बढ़ा दी है। वीएचपी ने प्रियंका गांधी वाड्रा, रामगोपाल यादव, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के बयानों को जांच के दायरे में लाने की मांग की है।

 

क्या है वीएचपी की मांग?

आरोपों का आधार बताएं नेता: वीएचपी ने कहा कि इन विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर चंदे में ₹20,000 करोड़ रुपये तक के महा-घोटाले और जमीन खरीद में गड़बड़ी के सार्वजनिक आरोप लगाए हैं।

जांच एजेंसी बुलाए समन: जांच एजेंसी को इन सभी नेताओं को पूछताछ के लिए बुलाना चाहिए और उनसे पूछना चाहिए कि उन्हें यह जानकारी कहां से मिली? क्या उनके पास इन दावों के समर्थन में कोई पुख्ता दस्तावेज या सबूत हैं?

ट्विटर (X) पर दी जानकारी: वीएचपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी आधिकारिक पोस्ट साझा कर बताया कि यदि ये नेता कोई विश्वसनीय सबूत पेश करते हैं, तो इससे जांच एजेंसियों को गबन के मामले में सच्चाई तक पहुंचने में बड़ी मदद मिलेगी, अन्यथा यह सिर्फ आस्था को ठेस पहुंचाने की साजिश है।

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