नेपाल में सत्तारूढ़ दल के संशोधित विधान में बड़ा बदलाव, प्रधानमंत्री बालेन्द्र पर शिकंजा कसा

काठमांडू : नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) ने अपने संशोधित पार्टी विधान में महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा है। नए नियम के अनुसार यदि संसदीय दल का नेता यानी प्रधानमंत्री पार्टी अध्यक्ष के नीतिगत निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसे पद से हटाया जा सकेगा।

 

संशोधित विधान में पार्टी अध्यक्ष के काम, कर्तव्य और अधिकारों के तहत ‘संसदीय दल के साथ समन्वय’ को वैचारिक और राजनीतिक नेतृत्व का हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत अध्यक्ष को यह अधिकार दिया गया है कि यदि वह स्वयं संसदीय दल का नेता नहीं है, तो भी वह संसद में पार्टी की आधिकारिक नीति, सिद्धांत, निर्णय और दृष्टिकोण के प्रभावी प्रतिनिधित्व तथा क्रियान्वयन के लिए संसदीय दल को आवश्यक नीतिगत मार्गदर्शन दे सकेगा।

 

विधान में स्पष्ट उल्लेख है कि पार्टी अध्यक्ष द्वारा दिए गए ऐसे नीतिगत निर्देशों का पालन करना संसदीय दल, उसके नेता यानि प्रधानमंत्री और सभी सांसदों का अनिवार्य दायित्व होगा। इस प्रावधान के अनुसार, यदि पार्टी अध्यक्ष के निर्देशों की अवहेलना की जाती है, तो संबंधित संसदीय दल के नेता को पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। यह व्यवस्था विधान की धारा 68 (1) में शामिल की गई है।

 

धारा में कहा गया है कि यदि संसदीय दल का नेता धारा 11(क) (3) के तहत पार्टी अध्यक्ष द्वारा दिए गए नीतिगत मार्गदर्शन का पालन नहीं करता है, तो उसे पदमुक्त किया जा सकता है। इसी धारा में अध्यक्ष को संसदीय दल को नीतिगत दिशा-निर्देश देने का अधिकार भी प्रदान किया गया है। इस नए प्रावधान के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने द्वारा जारी नीतिगत निर्देशों का पालन संसदीय दल के नेता और सभी आरएसपी सांसदों के लिए अनिवार्य होगा। यदि कोई नेता या सांसद इन निर्देशों की अनदेखी करता है, तो अध्यक्ष को उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए संसदीय दल के नेता को पद से हटाने का अधिकार प्राप्त होगा।

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