नई दिल्ली : कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के नेतृत्व में सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड मामले में उनके परिवार से मिलने जा रहा था, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने इस काफिले को काशी टोल प्लाजा पर ही रोक दिया। इस दौरान काफी देर तक हंगामा और अधिकारियों के साथ नोकझोंक हुई। अंततः प्रतिनिधिमंडल को वापस दिल्ली लौटना पड़ा।
राजेंद्र पाल गौतम ने इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्षी दलों के साथ भेदभाव कर रही है और केवल अपने सहयोगी संगठनों को ही पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दी जा रही है। पुलिस प्रशासन का रवैया पक्षपातपूर्ण है और कांग्रेस से डरकर उसे रोका गया। प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं और पुलिस गुंडों जैसा व्यवहार कर रही है।
प्रदेश प्रभारी ने मांग की कि मेरठ के एसएसपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर संविधान के अनुसार कार्रवाई की जाए, क्योंकि हिरासत में लिए गए अधिवक्ता के साथ मारपीट की गई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में उठाएगी और 27 जुलाई को जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करेगी।
गौतम ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी दलों को पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं दे रही है। उन्होंने पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा, परिवार के सदस्यों को नौकरी और मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल में सांसद इमरान मसूद, तनुज पूनिया, केएल शर्मा, राज्यसभा सदस्य कर्मवीर बौद्ध, विधायक वीरेंद्र चौधरी, दिल्ली प्रदेश एससी विभाग के अध्यक्ष संजय नीरज सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आगे जाने से यह कहते हुए रोका कि परिवार का कोई सदस्य गांव में मौजूद नहीं है और उनके जाने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।
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