नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी (आआपा) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान की आलोचना की।
राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सरकार ने मिलकर के देश के युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
गांधी ने कहा कि सरकार ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर पूरा कब्जा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया और इसके जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने सरकार के सामने तीन मांगें रखी है, पहला धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं जाए, दूसरा छात्रों से माफी मांगे और तीसरा छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।
साथ ही आआपा के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए इसे छात्रों के आंदोलन को दबाने की ‘लीपापोती’ करार दिया और मांग की कि सरकार को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के बजाय पेपर लीक के इस पूरे रैकेट और इसमें शामिल बड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज सुबह प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट तो पहले ही बहुत बने थे, पोक्सो के लिए, रेप केस जैसे कई मुद्दो पर बने है लेकिन उनमें सुनवाई तो होती नही है।
केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सारी बाते कही लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बीत क्यों नही की।
केजरीवाल ने दुख जताते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ प्रदर्शन में जो व्यवहार किया गया उस पर सरकार चुप क्यो थी, कोई भी कार्रवाई क्यो नही किया गया।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हर साल पेपर लीक का मामला सामने आता है लेकिन प्रधानमंत्री ने एक भी ऐसी बात नही की कि अगले साल नीट पेपर लीक नही होगा।
विपक्ष ने सरकार से धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे और हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
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