Moradabad : ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने 25 जुलाई की शाम मुरादाबाद में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। ओवैसी ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ समाजवादी पार्टी को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार जनविरोधी नीतियां अपना रही है, तो दूसरी तरफ खुद को जनता का हमदर्द बताने वाली समाजवादी पार्टी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे बैठी है। ओवैसी के इस तीखे हमले ने सपा के दावों और उसकी चुप्पी पर गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
ओवैसी ने ठाकुरद्वारा से समाजवादी पार्टी के विधायक नवाब जान पर सीधा और कड़ा हमला बोला। उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा कि क्षेत्र में राजस्व विभाग द्वारा 36 संपत्तियों और स्थलों की सूची तैयार कर कार्रवाई प्रस्तावित की गई है, जिससे स्थानीय जनता में चिंता का माहौल है। लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र के सपा विधायक नवाब जान पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि जब जनता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए परेशान है, तब सपा के जनप्रतिनिधि केवल मूकदर्शक बने हुए हैं। सपा की यह चुप्पी साबित करती है कि संकट के समय वह जनता के साथ खड़े होने के बजाय सिर्फ वोटों की राजनीति करती है।
मीडिया से बातचीत के दौरान ओवैसी ने युवाओं के 36 दिनों तक चले आंदोलन का जिक्र करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 36 दिनों के कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार सरकार को युवाओं की लोकतांत्रिक ताकत के आगे झुकना पड़ा। ओवैसी ने छात्रों की इस जीत पर बधाई दी, लेकिन साथ ही पुलिसिया कार्रवाई पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए चार युवाओं पर रबर बुलेट चलाई गईं, जिसमें एक छात्र की आंख गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि एक अन्य छात्र और एक पत्रकार भी घायल हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे और रबर बुलेट झेल रहे थे, तब सपा का कोई नेता युवाओं के हक में खड़ा क्यों नहीं हुआ?
पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए ओवैसी ने कहा कि केवल करोड़ों रुपये के जुर्माने का प्रावधान कर देने से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। सरकार को यह बताना होगा कि बार-बार पेपर लीक कैसे हो रहे हैं और इसके असली जिम्मेदार लोगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसके अलावा, उन्होंने 2019 में शुरू की गई फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद आज भी हजारों मामले अदालतों में लंबित पड़े हैं और न्याय में देरी खुद अन्याय बन चुकी है।
अपने संबोधन के अंत में असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट लहजे में कहा कि देश को दमन की राजनीति से नहीं, बल्कि डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान और कानून की मर्यादा से चलाया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार और विपक्ष दोनों यह समझ लें कि जनता अब पूरी तरह जागरूक हो चुकी है।
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