New Delhi : संसद में परीक्षा प्रणाली और सुधारों से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने सरकार की क्रूरता और पुलिस का अमानवीय चेहरा अपनी आंखों से देखा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल और लाठीचार्ज जैसी घटनाओं को देश कभी नहीं भूलेगा और विपक्ष संसद में गृह मंत्री के जवाब की मांग करता है।
‘डर गायब हो गया, खून से लथपथ चेहरों के साथ ललकार रहे थे युवा’
संसद में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए गौरव गोगोई ने 20 जुलाई की उस रात को याद किया जब भारी संख्या में छात्र प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने कहा, “लोगों के दिलों से डर पूरी तरह गायब हो चुका था। खून से लथपथ चेहरे के बावजूद एक लड़का पुलिस को ललकार रहा था।”
उन्होंने वसीम बरेलवी की मशहूर पंक्तियों “उसूलों पर आंच आए, तो टकराना जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है” का जिक्र करते हुए पुलिस की बर्बरता की दास्तान सुनाई। गोगोई ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ बेरहमी से लाठियां भांजी, बल्कि एक लड़की के गाल पर थप्पड़ मारा और एक बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर हमला किया गया। उन्होंने देश भर के आम नागरिकों और वकीलों का धन्यवाद किया जिन्होंने स्विगी के जरिए खाना भिजवाकर और कानूनी मदद देकर प्रदर्शनकारी छात्रों का साथ दिया।
‘पेनल्टी और सजा बढ़ाने से नहीं सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था’
केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए गोगोई ने कहा कि सरकार शिक्षा के जरिए युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के बजाय उन्हें केवल अपने दल का वोटर बनाने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि कानून में पेनल्टी और सजा का दायरा बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं आने वाला है।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे सिर्फ एक ‘सिंबल’ हैं, और उनके केवल पद से हटने मात्र से छात्रों का शिक्षा तंत्र पर से उठा विश्वास वापस नहीं आ जाएगा। आज अगर छात्र, विभिन्न दल और संगठन सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं, तो सरकार को उनकी पीड़ा और विवशता को समझना चाहिए। उन्होंने गोपालदास नीरज की पंक्तियां”कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे…”सुनाते हुए देश में बढ़ती बेरोजगारी और परीक्षा में फेल होने के कारण छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं पर गहरी चिंता जताई।
NTA की कार्यप्रणाली और नियुक्तियों पर उठाए गंभीर सवाल
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर सवाल उठाते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंस्टाग्राम पर ध्यान देने की बात कहते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने आंकड़े रखते हुए कहा, “NTA की स्वीकृत (सैंक्शन) क्षमता सिर्फ 34 पदों की है, तो फिर 47 पदों पर कार्रवाई कैसे की गई? 47 लोग कौन हैं?”
उन्होंने NTA के चेयरमैन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्हें एक विशेष संगठन से जुड़े होने के कारण बचाया जा रहा है। गोगोई ने कहा कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के चेयरमैन पद पर रहते हुए भी धांधली के आरोप लगे थे। सरकार शिक्षा विभाग में वास्तविक सुधार नहीं चाहती क्योंकि यह विभाग आरएसएस के एजेंडे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, यही वजह है कि विश्वविद्यालयों और फैकल्टी में क्वालिटी पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
‘यह नया बिल सरकार की विफलता का एक स्मारक है’
असम में आई भीषण बाढ़ और 70 लोगों की मौत का हवाला देते हुए कांग्रेस सांसद ने राज्य के लिए विशेष पैकेज की मांग की। पेश किए जा रहे नए संशोधन बिल पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून सरकार की नाकामी का एक स्मारक मात्र है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दो साल पहले भी जब यह बिल लाया गया था, तब बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन आज स्थिति यह है कि 2024 के नीट पेपर लीक मामले में चार्जशीट किए गए 46 में से 44 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। मास्टरमाइंड कहे जाने वाले संजीव मुखिया सहित कई आरोपी जेल से बाहर आ चुके हैं। गोगोई ने दो टूक कहा कि जिस मंशा से सरकार यह कानून आज ला रही है, यह पहले भी विफल था और आगे भी पूरी तरह विफल ही साबित होगा।
Shaurya Times | शौर्य टाइम्स Latest Hindi News Portal