मप्र के इंदौर में मेजर हमजा आरिफ को सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, लगे देशभक्ति के नारे

इंदौर : मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के लिए रविवार का दिन बेहद भावुक रहा। राजस्थान के जैसलमेर में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले शहर के वीर सपूत मेजर हमजा आरिफ को पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ हजारों लोगों को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान जमकर देशभक्ति के नारे लगे।

 

एक महीने पहले जिस घर में शादी की खुशियां गूंज रही थीं, वहां रविवार को मातम पसरा था। तिरंगे में लिपटे मेजर हमजा आरिफ के पार्थिव शरीर को देखकर हर आंख नम थी। पत्नी ज्योति अरोरा का दर्द, माता-पिता की खामोशी और सेना की अंतिम सलामी ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

 

राजस्थान के जैसलमेर में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर रविवार सुबह इंदौर के सैफी नगर स्थित उनके निवास पर पहुंचा। सुबह से ही उनके निवास पर लोगों का तांता लगा हुआ था। सबसे पहले पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। सुबह करीब नौ बजे सैफी नगर में जनाजे की नमाज अदा की गई। इसके बाद सेना के वाहन में तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के लिए रवाना हुआ। तिरंगे में लिपटी ताबूत के साथ जनाजा सैफी नगर मस्जिद से आगे बढ़ा और माणिकबाग पुल, कलेक्टर चौराहा, राजबाड़ा और सदर बाजार होते हुए इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंचा।

 

रास्ते भर लोग अपने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर मेजर हमजा आरिफ को अंतिम सलाम करते रहे। राजबाड़ा पर बड़ी संख्या में लोग पहले से मौजूद थे। जैसे ही सेना का वाहन वहां पहुंचा, पूरा इलाका भारत माता की जय और मेजर हमजा आरिफ अमर रहें के नारों से गूंज उठा। लोगों ने हाथ जोड़कर और सैल्यूट कर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। कब्रिस्तान में सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर अपने साथी अधिकारी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

 

अंतिम विदाई का सबसे भावुक पल तब आया, जब पत्नी ज्योति अरोरा अपने पति को आखिरी श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। कांपते हाथों से उन्होंने तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को नमन किया, लेकिन खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर संभाला। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सेना के अधिकारियों ने वह तिरंगा पत्नी ज्योति अरोरा को सौंपा, जिसमें लिपटकर मेजर हमजा आरिफ अपने घर लौटे थे। उन्होंने तिरंगे को सीने से लगा लिया।

 

अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार में राजस्थान और मध्य प्रदेश से सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। कर्नल, लेफ्टिनेंट और मेजर रैंक के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में बोहरा समाज के लोग, शहरवासी, रिश्तेदार और मित्र भी मौजूद रहे। हर कोई अपने वीर बेटे को नम आंखों से विदाई देता नजर आया।

 

परिजनों ने बताया कि मेजर हमजा आरिफ का विवाह करीब एक महीने पहले ही हुआ था। शादी के बाद वह कुछ दिन की छुट्टी बिताकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि नई जिंदगी की शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद वह तिरंगे में लिपटकर घर लौटेंगे।

 

गौरतलब है कि गुरुवार देर रात राजस्थान के जैसलमेर जिले में यह हादसा हुआ था। 31 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ अपने दो साथी अधिकारियों के साथ ड्यूटी पूरी कर सेना की टाटा सफारी से सैन्य स्टेशन लौट रहे थे। थईयात सैन्य क्षेत्र के पास अचानक एक ऊंट सड़क पर आ गया। वाहन ऊंट से टकराकर अनियंत्रित हो गया और कई बार पलटते हुए काफी दूर तक घिसटता चला गया। हादसे में मेजर हमजा आरिफ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद दो लेफ्टिनेंट गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका इलाज सैन्य अस्पताल में जारी है। हादसे में ऊंट की भी मौत हो गई।

 

मेजर हमजा के परिजन सेना के विशेष वाहन में पार्थिव देह को सड़क मार्ग से लेकर शनिवार सुबह जैसलमेर से निकले थे। देर रात शव इंदौर पहुंचा। सबसे पहले वाहन महू छावनी पहुंचा। वहां मेजर हमजा को श्रद्धांजलि देने के बाद पार्थिव देह को उनके निवास पर लाया गया। हमजा आरिफ पिछले नौ वर्षों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। उनके पिता आरआर कैट से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में माता-पिता और तीन बहनें हैं। उनकी असमय मौत से सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा इंदौर शोक में डूबा हुआ है।

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