अशोक सिंघल का जीवन त्याग और संघर्ष का प्रतीक : अमित शाह

नई दिल्ली : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि अशोक सिंघल का संपूर्ण जीवन त्याग, सादगी, धर्मनिष्ठा, उत्कृष्ट राष्ट्रभक्ति और स्वयंसेवकत्व का अद्वितीय उदाहरण रहा है। आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा और प्रेरणा देने के लिए अशोक सिंघल का जीवन-दर्शन जन-जन तक पहुंचाना जरूरी है।

 

केन्द्रीय मंत्री अमित शाह आज दिल्ली स्थित भारत मंडपम में विश्व हिंदू परिषद् (विहिप) के वरिष्ठ प्रचारक एवं रामजन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार दिवंगत अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ 100 वैदिक आचार्यों द्वारा शंखनाद और मंत्रोच्चार के साथ किया गया।

 

मुख्य अतिथि शाह ने अशोक सिंघल के साथ अपने व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए उनके अप्रतिम त्याग को रेखांकित करते हुए कहा, जब कांग्रेस पार्टी ने मुझे जेल में डाला और मैं दिल्ली में तीन साल के संकट के दौर से गुजर रहा था, तब मैं अक्सर विहिप कार्यालय में उनसे मिलने जाता था। इतने समृद्ध परिवार से आने के बावजूद वे 20 वर्गमीटर के एक छोटे-से कमरे में रहते थे, जहां एक ही जगह रसोई, बिस्तर और स्नानघर था। उन्होंने अपने जीवन के 20 वर्ष इसी सादगी के साथ उसी कमरे में बिताए।

 

उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल की केंद्रीय भूमिका का उल्लेख किया और कहा कि 550 वर्षों के संघर्ष और बलिदान के बाद आज जो भव्य राममंदिर का निर्माण हुआ है, उसकी नींव में उनका संकल्प रचा-बसा था। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन दौर का स्मरण कराते हुए कहा कि जब कारसेवकों पर निर्मम लाठीचार्ज किया जा रहा था, तब वे भेष बदलकर मोर्चे पर डटे रहे। सिर पर गहरी चोट लगने के बाद जब खून बहने लगा, तो उन्होंने गमछे से खून पोंछते हुए संघर्ष जारी रखा। यह दृश्य राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की पराकाष्ठा था, जिसे आने वाली पीढ़ियां सदियों तक याद रखेंगी।

 

एक सच्चे स्वयंसेवक के अनुशासन का उदाहरण देते हुए गृह मंत्री ने एक कार्यक्रम का संस्मरण सुनाया। उन्होंने बताया कि गंभीर अस्वस्थता और सांस फूलने के बावजूद जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने उनसे गीत गाने का आग्रह किया तो अशोक सिंघल ने तुरंत माइक संभालते हुए कहा जब सरसंघचालक जी ने कह दिया तो मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचता। यह भाव केवल एक निष्ठावान और समर्पित स्वयंसेवक के भीतर ही हो सकता है।

 

शाह ने अशोक सिंघल की जन्मशती मनाने के औचित्य पर उठने वाले सवालों का जवाब दिया और कहा कि जब समाज अपने सच्चे नायकों और आदर्शों को भूल जाता है, तब वहां वैचारिक शून्यता पैदा हो जाती है। दिशाहीन होकर युवा वर्ग हजारों किलोमीटर दूर की सभ्यताओं में आदर्श तलाशने लगता है।

 

अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंघल मानते थे कि रामजन्मभूमि का आंदोलन पीढ़ियों की लड़ाई है। वर्ष 2014 में देश में आए राजनीतिक और वैचारिक परिवर्तन के बाद सरकार की सभी बाधाएं दूर हुईं और 70 वर्षों के गतिरोध को समाप्त कर भव्य राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

 

महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने कहा कि उन्होंने अशोक सिंघल के अनुशासन और निष्ठा को देखा है। वे नौकरी कर सकते थे, राजनीति में जा सकते थे लेकिन उन्होंने देश को चुना और जीवन भर देश सेवा की। उन्होंने युवाओं से कहा कि राजनीति और धर्म के प्रति सजग रहो लेकिन परिश्रम करते रहो, क्योंकि परिश्रम ना करने वालों का सबकुछ चला जाता है।

 

इस मौके पर अशोक सिंघल के संपूर्ण जीवन-दर्शन, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई। इस दौरान “मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य पदचिह्न” नामक कॉफी टेबल बुक का विमोचन तथा श्रीराम स्तंभ की भव्य प्रतिकृति और अयोध्या में प्रभु श्रीराम के वन गमन पथ पर स्थापित किए गए 11 ऐतिहासिक श्रीराम स्तंभों का डिजिटल माध्यम से अनावरण किया गया। साथ ही, डाक टिकट भी जारी किया गया।

 

इस अवसर पर सामाजिक सरोकार के तहत अयोध्या के कारसेवकपुरम में दिव्यांगजनों के लिए 27 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलने वाले कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर की शुरुआत की गई। कलाकारों ने रामायण के विशिष्ट प्रसंगों पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी।

 

इसके अलावा विहिप के संगठनात्मक 44 प्रांतों में एक सप्ताह के भीतर विशाल सभा और विशिष्ट आयोजन होंगे। नागपुर के कार्यक्रम में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गुरुग्राम में हरियाणा के मुख्यमंत्री सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी।

 

विहिप के अनुसार जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर देश-विदेश में सालभर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य पूरे वर्षभर सेवा, सामाजिक समरसता, हिन्दू सशक्तिकरण और वैदिक ज्ञान-विज्ञान का प्रचार जैसे कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, विहिप प्रांत अध्यक्ष डॉ उपासना अरोड़ा, अशोक सिंघल फाउंडेशन के संयोजक महेश भागचंदका और विहिप के केंद्रीय महामंत्री बजरंग बागड़ा सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

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