नई दिल्ली। दिल्ली में बुधवार को हुई INDIA ब्लॉक की अहम बैठक के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी सवाल उठे। बैठक के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा गया कि क्या 2029 में राहुल गांधी विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। ममता ने कहा कि गठबंधन की ओर से गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी।
बैठक का मुख्य फोकस हालांकि 2029 के लिए प्रधानमंत्री पद के चेहरे पर नहीं, बल्कि चुनाव आयोग, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर रहा। विपक्षी दलों ने इन मुद्दों पर संयुक्त अभियान चलाने और देशभर में प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
राहुल गांधी के 2029 वाले सवाल पर ममता ने क्या कहा?
ममता बनर्जी से जब राहुल गांधी के 2029 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में अभी कुछ नहीं कहेंगी और गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन की ओर से जानकारी दी जाएगी।
बैठक के बाद INDIA ब्लॉक की ओर से 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए किसी एक नेता को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई। फिलहाल गठबंधन की सार्वजनिक रूप से घोषित रणनीति चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।
दीपांकर भट्टाचार्य बोले- यह बैठक का मुद्दा नहीं था
CPI(ML) नेता दीपांकर भट्टाचार्य से भी राहुल गांधी के 2029 में प्रधानमंत्री बनने से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया मांगी गई। उन्होंने कहा कि यह बैठक का विषय नहीं था।
उन्होंने कहा कि बैठक में चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दीपांकर ने यह भी कहा कि राहुल गांधी इन मुद्दों पर कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं और विपक्षी दलों ने भी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं।
2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर प्रदर्शन
बैठक के बाद INDIA ब्लॉक ने चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर संयुक्त आंदोलन का ऐलान किया। विपक्षी दल 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से 8 अक्टूबर तक देश के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे।
इसके अलावा 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। विपक्षी दलों ने आगे राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने की भी तैयारी की है।
तेजस्वी यादव ने SIR और CEC को लेकर लगाए आरोप
बैठक के बाद RJD नेता तेजस्वी यादव ने SIR और चुनाव आयोग को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि SIR की शुरुआत बिहार से हुई और उस समय विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किए जाने की आशंका जताई थी।
तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी आरोप लगाए और दावा किया कि उन्हें बचाने के लिए नियमों में बदलाव किए गए। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी चयन समिति में बदलाव का भी जिक्र किया। ये सभी तेजस्वी यादव के आरोप हैं। चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
तेजस्वी यादव ने जामुई की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि POCSO कानून के तहत पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती, लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐसा किया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, लेकिन मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। ये भी तेजस्वी यादव के आरोप हैं।
विपक्ष का फोकस फिलहाल SIR और चुनाव आयोग पर
INDIA ब्लॉक की बैठक में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति तय की। गठबंधन ने संयुक्त रूप से देशभर में अभियान चलाने का फैसला किया है।
चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया को नियमों के तहत किए जाने की बात कही है और आयोग के भीतर मतभेदों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। ऐसे में आगे होने वाले प्रदर्शनों और राजनीतिक बयानों के बीच इन आरोपों और आयोग के जवाब पर भी नजर रहेगी।
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