New Delhi : भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। तुर्किये में छिपकर बैठा कुख्यात ड्रग किंगपिन नवप्रीत सिंह आखिरकार भारत की गिरफ्त में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को इस बड़ी कामयाबी की जानकारी देते हुए इसे मोदी सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर बताया है। आरोप है कि नवप्रीत सिंह फर्जी पहचान का सहारा लेकर तुर्किये की नागरिकता हासिल कर चुका था और वहां से अफगानिस्तान के रास्ते भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों की बड़े पैमाने पर तस्करी करा रहा था।
फर्जी पहचान और ‘नवाब विर्क’ बनकर रच रहा था साजिश
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी नवप्रीत सिंह ने तुर्किये में अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और ‘नवाब विर्क’ के नाम से तुर्किये की नागरिकता ले रखी थी। इस छद्म नाम और पहचान के आड़ में वह भारत, अफगानिस्तान और तुर्किये के बीच फैले एक विशाल अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ (नारकोटिक्स) नेटवर्क को संचालित कर रहा था। भारतीय खुफिया और जांच एजेंसियों ने उसकी असली पहचान का पर्दाफाश करते हुए उसे कानूनी शिकंजे में लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रत्यर्पण और वापसी की प्रक्रिया शुरू की थी।
साल 2021 के बड़े ड्रग भंडाफोड़ से जुड़े हैं तार
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की परतें सबसे पहले साल 2021 में उस वक्त खुली थीं, जब दक्षिण दिल्ली से रिजवान कश्मीरी की गिरफ्तारी हुई थी। उससे पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर जांच का दायरा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों तक फैल गया। इस दौरान फरीदाबाद में पुलिस ने छापेमारी कर भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की थी। जांच में सामने आया था कि एक वाहन से करीब 166 किलोग्राम, दूसरे वाहन से लगभग 115 किलोग्राम और एक अन्य ठिकाने से करीब 70 किलोग्राम हेरोइन व मन:प्रभावी पदार्थ (Psychotropic substances) बरामद किए गए थे। इस नेटवर्क में अफगानिस्तान से जुड़े तस्करों की भूमिका भी खुलकर सामने आई थी।
चचेरे भाई प्रभदीप सिंह की अजरबैजान से हुई थी वापसी
इस पूरे सिंडिकेट की जांच के दौरान नवप्रीत सिंह के चचेरे भाई प्रभदीप सिंह का नाम भी मुख्य आरोपियों में आया था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, प्रभदीप भारत के भीतर इस नेटवर्क की गतिविधियों को संभालने और विदेशी आकाओं के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करता था। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी हुआ था। इसके बाद भारतीय एजेंसियों, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के संयुक्त समन्वय से मई 2026 में अजरबैजान की राजधानी बाकू से प्रभदीप सिंह को ट्रेस कर भारत वापस लाया गया था।
सरकार का स्पष्ट संदेश: दिसंबर 2029 तक खत्म होगा हर नार्को-कार्टेल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार देश से नशे के काले कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दिसंबर 2029 तक हर एक नार्को-कार्टेल को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। अब नवप्रीत सिंह के भारत लौटने के बाद जांच एजेंसियां उससे गहन पूछताछ कर रही हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा भारत में इसकी फंडिंग और सप्लाई के मुख्य रास्ते कहां-कहां तक फैले हुए थे।
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