आशा एवं आशा संगिनी को ‘राज कर्मचारी’ का दर्जा और निश्चित मानदेय न मिलने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ:  कार्यक्रम ग्रामीण स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के  दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन संगठन का मानना है कि इस पहल के वास्तविक सफलता के लिए आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं की लंबे समय से लंबित मांगों को सरकार द्वारा मनना अत्यंत आवश्यक है। समस्त प्रदेश की आशा एवं आशा संगिनी ठंडी, गर्मी, बरसात की परवाह न करते हुए कदम से कदम मिलाकर सरकार द्वारा चलाई जा रही, समस्त योजना को सफल बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद आशा एवं आशा संगिनी कार्यकत्री सेवा समिति की पदाधिकारी बहनों ने राष्ट्रीय संरक्षक आशीष तिवारी को राखी बांधी।

आशा एवं आशा संगिनी कार्यकत्री सेवा समिति के राष्ट्रीय संरक्षक आशीष तिवारी ने बताया कि आठ प्रकार के कार्यो के लिए हम आशा एवं आशा संगिनीयों की नियुक्ति की गई थी, परंतु इनको 2023- 24 के गाइडलाइन के आधार पर 53 प्रकार के कार्य दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त भी कई अन्य कार्य लिए जाते हैं, बिना किसी प्रशिक्षण के जैसे डाटा ऑपरेटर वाले कार्य लिए जाते हैं, जैसे आयुष्मान भारत कार्ड, आभा कार्ड, सी बैक फॉर्म, ई कवच सर्वे, दस्तक अभियान, फाइलेरिया अभियान, कोविड जैसे महामारी, भारत सरकार पोलियो मुक्त बनाने का कार्य इसके अतिरिक्त संचारी रोग एवं दस्तक अभियान, टीवी खोज अभियान का 100 दिन का कार्य आशा एवं आशा संगिनी से एकदम मुफ्त में करवाया जा रहा है।

आशीष तिवारी ने बताया कि इसके बाद ग्राम सभा में 1000 से 1500 की आबादी पर अगर कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है, अथवा महिला प्रशव के लिए भी, आशा को रात्रि के समय भी कार्य करना पड़ता है, यदि सरकार द्वारा आशा एव आशा संगिनी से इतना अधिक कार्य लिया जाता है। आशा और आशा संगिनी कार्यकत्रियों ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की रीड की हड्डी है, जो अथक परिश्रम और समर्पण के साथ कार्य करती हैं। सभी कार्यकत्री 20 वर्षों से अधिक समय से निरंतर अपनी सेवा दे रही हैं,

आशीष तिवारी ने जोर देते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनके उचित मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और कार्य स्थल पर सम्मान की अक्सर अनदेखी की जाती है। सरकार द्वारा पिछले वर्षों में की गई मानदेय वृद्धि  2017 , 2022 और सुनने में आ रहा है कि 2025 में आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्त्री के मानदेय में वृद्धि की है। हम इन वृद्धि की आलोचना करते जबकि 2025 की गाइडलाइन हमें उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह वृद्धि प्रयाप्त नहीं है और महंगाई एवं उनके बढ़ते कारभार के अनुपात में नहीं है। इन बहनों का मानदेय आज भी बहुत कम है और हमें न्यूनतम वेतन से भी कम मिल रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रोत्साहन राशि पर आधारित भुगतान प्रणाली अस्थिर और अन्यायपूर्ण है। यह हमें एक निश्चित आय से वंचित करती है और हमें मासिक आय को अनिश्चित बनाए रखती है,

आशा एवं आशा संगिनी कार्यकत्री सेवा समिति की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

प्रोत्साहन राशि बंद कर निश्चित मानदेय लागू करें: आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं के लिए प्रोत्साहन राशि पर आधारित भुगतान प्रणाली को तत्काल बंद किया जाए। इसके बजाय आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम ₹18,000 प्रति माह का निश्चित और नियमित मानदेय दिया जाए।
आशा संगिनी कार्यकर्ताओं को न्यूनतम ₹24,000 प्रति माह का निश्चित और नियमित मानदेय दिया जाए।
यह मानदेय उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों, बढ़ती महंगाई और उनकी लंबी सेवा अवधि को देखते हुए न्यायसंगत हो।
सामाजिक सुरक्षा लाभ: सभी आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं को पेंशन, भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया जाए।
नियमितीकरण और स्थायीकरण: लंबे समय से संविदा पर कार्यरत आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें स्थायी कर्मचारियों का दर्जा दिया जाए।
कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान: कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाए और उनके साथ होने वाले किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या शोषण पर कठोर कार्रवाई की जाए।
समय पर भुगतान: कार्यकर्ताओं के मानदेय का भुगतान नियमित और समय पर सुनिश्चित किया जाए, जिसमें किसी भी प्रकार की देरी न हो।
प्रशिक्षण और उपकरण: उन्हें आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और तकनीकों का पर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, और उनके कार्यों के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध करवाया जाए।
आशा एव आशा संगिनी को 5G टेबलेट अथवा 5G मोबाइल दिया जाए।
आशा एवं संगिनी से वह कार्य कदापि न लिया जाए,  जिसमें प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती हो। संगिनी बहनों का कार्य क्षेत्र बहुत बड़ा होता है, इसलिए उनको इलेक्ट्रिक स्कूटी प्रदान की जाए। संगिनी जिनका माह मे 24 दिन का कार्य दिया जाता है, उसे बढ़ाकर 30 दोनों का किया जाए।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जो आंगनबाड़ियों को दे दिया गया है वह पूनः आशा एवं संगिनी को वापस किया जाए यह कार्य 2017 से आशा एवं संगिनी बहने करती आ रही हैं।
वह बहने जो आशा में आशा संगिनी के पद पर कार्यरत थी, बीमारी अथवा दुर्घटना की वजह से जिनकी असमय मृत्यु हो गई उनके परिवार को आर्थिक मुआवजा दिया जाए तथा आशा की नियुक्ति में उनके परिवार के योग्य सदस्य को वरीयता दी जाए।
आशा एवं संगिनी के रिटायरमेंट के समय उनको कम से कम 20 लाख दिए जाए, जिससे वह अपना शेष जीवन सम्मान के साथ जी पाए सभी आशा एव संगिनी बहनों को निशुल्क 20 लाख तक का दुर्घटना बीमा दिया जाए।
2005 से अभी तक अपना अमूल्य समय दे चुकी आशा एवं संगिनी बहनों को पेंशन योजना का लाभ दिया जाए।
विगत 4 वर्षों से प्रधानमंत्री भारतीय वंदन योजना का बकाया भुगतान समस्त संगानी बहनों का शीघ्र करवाया जाए।
HBYC के कार्य में संगिनी बहनों के लिए कोई प्रोत्साहन राशि नहीं है, आता है प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाया जाए।
18-2005 से आशा एव सगिनी कार्य कर रहे हैं परंतु अगर हमारी तबीयत खराब हो जाती है तो अधिकारियों द्वारा हमें तुरंत निकाल दिया जा रहा है, जबकि सभी कर्मचारियों को मेडिकल छुट्टी भी दी जाती है।
प्रत्येक जिलों पर जो आशा सम्मेलन करवाया जाता है, उसे बंद किया जाए वही राशि आशाओं के हित में खर्च किया जाए। आशाओं को प्राथमिक चिकित्सा किट मिलने का प्रावधान है, परंतु वह नहीं मिल पा रहा है कृपया प्राथमिक किट दिलवाया जाए। आशा एव आशा संगिनी के परिवार के सदस्यों को भी आयुष्मान भारत कार्ड योजना में जोड़ा जाए।

आशा एवं आशा संगिनी कार्यकत्री सेवा समिति की कार्यकारिणी:

राष्ट्रीय संरक्षक आशीष तिवारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष- श्रीमती पुष्पा तिवारी।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- निरमेश त्यागी।
राष्ट्रीय सचिव-  उषा सिंह।
प्रदेश अध्यक्ष मनीष| यादव।
प्रदेश उपाध्यक्ष- उर्मिला सिंह।
प्रदेश महामंत्री- संध्या सिंह।
प्रदेश सचिव- उषा पटेल।
सचिव- किरण जी।

आशा एवं आशा संगिनी कार्यकत्री सेवा समिति ने आज यूपी प्रेस क्लब में आशीष तिवारी के नेतृत्व में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें बड़ी संख्या में आशा बहनों की उपस्थिति रही।
इस सम्मेलन में खास कर निर्मला चौबे, मंजू सिंह, नीलम शुक्ला,दुर्गेश नंदिनी, संगीता पाल, राधा देवी, रीना राठौर, गीता देवी, मालती देवी,सुषमा देवी, विनीता देवी,शिवाजी, अनीता देवी, अर्चना यादव, ममता सिंह, शारदा वर्मा, रेखा यादव, मधुलिका सिंह, राधिका देवी, रंभा देवी, रुक्मणी, कविता सिंह,रंजन उपाध्याय,सुनीता वर्मा, गुड्डी देवी, लक्ष्मी वर्मा, मिथिलेश, सरिता देवी,सुमन, मंजू वर्मा, सारिका चौधरी, शारदा,संगीता  सरस्वती देवी, सुनीता वर्मा,गुलावठी देवी, हीरा मोती,उर्मिला उपस्थित रही।
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