India China Relation: चीन के विदेश मंत्री वांग यी इन दिनों भारत दौरे पर हैं. भारत से संबंधों के साथ-साथ वांग यी ने ट्रंप टैरिफ को लेकर भी बातचीत की है. खास बात यह है कि जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50 फीसदी टैरिफ लगाकर मुश्किलें बढ़ाने की कोशिश की है वहीं चीन ने इस दौरान भारत का साथ देने का वादा किया है. वांग यी ने कहा है कि चीन टैरिफ वार के बीच भारत की तीन दिक्कतों को दूर करने में मदद करेगा.
इन तीन चिंताओं को दूर करने का मिला आश्वासन
चीन की ओर से भारत को ट्रंप टैरिफ वार के बीच जिन तीन चिंताओं को दूर करने का आश्वासन चीन कीओर से मिला है उसमें रेयर अर्थ मिनरल्स, फर्टिलाइजर्स और टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति प्रमुख रूप से शामिल हैं. वांग यी ने भरोसा दिलाया है कि इन चिंताओं को दूर करने में चीन भारत के साथ खड़ा है.
रेयर अर्थ, फर्टिलाइज़र और टनल तकनीक में सहयोग का वादा
भारत इन दिनों तकनीकी और औद्योगिक प्रगति की दिशा में कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है. इस विकास में तीन संसाधन सबसे अधिक जरूरी हैं:
– दुर्लभ मृदा खनिज (Rare Earth Minerals) – इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों में बेहद आवश्यक.
– उर्वरक (Fertilizers) – कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी
– टनल बोरिंग मशीन (TBM) – सड़क और रेल सुरंग निर्माण के लिए अहम
भारत को इन तीनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता है और चीन ने पहली बार इन मुद्दों पर सकारात्मक सहयोग का संकेत दिया है. वांग यी ने जयशंकर को भरोसा दिलाया कि चीन इन तीनों जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को तकनीकी, आपूर्ति और कच्चे माल में समर्थन देगा.
मुलाकात में उठे कई द्विपक्षीय मुद्दे
बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर ने व्यापार, तीर्थयात्रा, सीमा व्यापार, नदी डेटा साझाकरण और लोगों से संपर्क जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत-चीन संबंध बहुआयामी हैं और इनका असर सिर्फ दोनों देशों पर नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता पर भी पड़ता है.
जयशंकर ने यह भी कहा कि दोनों देशों को प्रतिबंधात्मक व्यापार उपायों से बचना चाहिए और पारस्परिक सम्मान और हितों के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए.
एससीओ समिट की तैयारी, पीएम मोदी की संभावित चीन यात्रा
वांग यी का भारत दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब 31 अगस्त से सितंबर के बीच चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन होने जा रहा है. इस बात की चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जा सकते हैं. ऐसे में वांग यी की यात्रा को समीक्षा और संभावित संवाद की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, जहां द्विपक्षीय रिश्तों को दोबरा मजबूती देने की कोशिश की जा रही है.
संबंधों में नया मोड़?
भारत और चीन के बीच कई वर्षों से तनावपूर्ण रिश्ते रहे हैं, खासकर सीमा विवाद और व्यापार अवरोधों को लेकर. लेकिन वांग यी की इस यात्रा और उनके आश्वासन से यह संकेत जरूर मिलता है कि दोनों देश अब सकारात्मक संवाद और समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं. यह सहयोग धरातल पर उतरता है तो यह भारत की औद्योगिक और कृषि विकास यात्रा में बड़ा योगदान दे सकता है.
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