नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में सरकार के खिलाफ जारी आंदोलन अब हिंसक मोड़ ले चुका है. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सरकार के खिलाफ युवाओं और आम नागरिकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है. प्रदर्शनकारियों ने कई मंत्रियों और नेताओं के घरों पर हमला कर आगजनी की. हालात इतने बिगड़े कि मंगलवार दोपहर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
हंगामे में मचा तांडव
सोमवार को शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान राजधानी में भारी बवाल हुआ. प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय और पूर्व प्रधानमंत्रियों के घरों पर हमला किया. झलनाथ खनाल के घर को आग लगा दी गई, जिसमें उनकी पत्नी राजलक्ष्मी गंभीर रूप से घायल हुईं और बाद में उनकी मौत हो गई. वित्त मंत्री बिष्णु पौडेल पर भी भीड़ ने हमला किया, जिसके बाद उनकी जान मुश्किल से बचाई जा सकी. अब तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक 22 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा घायल हैं.
सेना के हाथ में कमान
हालात बेकाबू होते देख नेपाल सेना की तैनाती बढ़ा दी गई है. चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ अशोक राज सिग्देल जल्द ही राष्ट्र को संबोधित करेंगे. अनुमान है कि सेना अस्थायी तौर पर देश की कमान संभाल सकती है. वहीं, इंटरनेट सेवाओं पर भी सख्ती की गई है. फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे कई प्लेटफॉर्म बंद कर दिए गए हैं, जबकि टिकटॉक चालू रहने से चीन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.
भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट
नेपाल में मचे बवाल का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है. बिहार के अररिया जिले के जोगबनी बॉर्डर को हाई अलर्ट पर रखा गया है. सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई गई है ताकि कोई भी असामाजिक तत्व सीमा पार कर गड़बड़ी न फैला सके. सीमा पार से होने वाली हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.
नेपाल में लोकतंत्र और स्थिरता को लेकर यह सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है. सरकार गिरने के बाद अब सवाल है कि नए नेतृत्व में देश की दिशा कौन तय करेगा. वहीं, भारत के लिए भी यह हालात चिंता का विषय हैं, क्योंकि पड़ोसी देश की अशांति का सीधा असर सीमा क्षेत्रों पर पड़ सकता है.
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