पड़ोसी प्रथमः भारत ने श्रीलंका में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का बजट किया दोगुना

कोलंबो (शाश्वत तिवारी)। भारत ने श्रीलंका में 3 ‘ग्राम शक्ति’ हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए फाइनेंशियल कमिटमेंट दोगुना कर दिया है, जिससे हर घर के लिए कंट्रीब्यूशन 5 लाख एसएलआर (श्रीलंकाई रुपया) से बढ़कर 10 लाख एसएलआर हो गया है। पड़ोसी देश के उत्तरी और दक्षिणी प्रांतों में 1550 से अधिक आर्थिक तौर पर कमजोर परिवारों को इन तीन प्रोजेक्ट्स के तहत बढ़ी हुई मदद से काफी फायदा पहुंचेगा।
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा और आवास निर्माण एवं जल आपूर्ति मंत्रालय के सचिव इंजीनियर एल.बी. कुमुदु लाल ने बढ़ाई गई ग्रांट से जुड़े डिप्लोमैटिक लेटर्स का आदान-प्रदान किया। उच्चायोग ने बताया कि श्रीलंका में अपने हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (एचआईसीडीपी) फ्रेमवर्क के तहत कई अन्य प्रोजेक्ट्स के अलावा भारत सरकार अक्टूबर 2017 और अक्टूबर 2018 में साइन किए गए समझौता ज्ञापनों के तहत तीन हाउसिंग-सेक्टर प्रोजेक्ट्स: ग्राम शक्ति उत्तर, ग्राम शक्ति दक्षिण I और ग्राम शक्ति दक्षिण II को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
उच्चायोग ने कहा एमओयू के प्रावधानों के तहत भारत सरकार श्रीलंकाई सरकार द्वारा चुने गए कम आय वाले परिवारों को उत्तरी और दक्षिणी प्रांतों में मालिक-संचालित मॉडल के तहत घरों के निर्माण के लिए पांच लाख एसएलआर जारी कर रही थी। कोविड-19 महामारी और उसके बाद कीमतों में बढ़ोतरी, साथ ही 2022 में श्रीलंका में पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों के कारण, प्रोजेक्ट्स के लाभार्थियों को आवंटित सहायता के भीतर अपने घरों का निर्माण पूरा करने में मुश्किल हो रही थी। इसलिए श्रीलंका सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार प्रति घर वित्तीय सहायता को दोगुना करके 10 लाख एसएलआर करने पर सहमत हो गई है।
बता दें कि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति पर चलते हुए श्रीलंका की विभिन्न क्षेत्रों में लगातार मदद करता रहा है। श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी प्रांतों तथा बागान क्षेत्रों में प्रमुख भारतीय आवास परियोजना के तहत लगभग 50 हजार घरों का निर्माण किया गया है और उन्हें लाभार्थियों को सौंप भी दिया गया है। परियोजना के चरण IV के हिस्से के रूप में 10,000 और घरों का निर्माण चल रहा है। इसके अलावा भारत ने हाल ही में चक्रवात डिटवाह से जूझ रहे श्रीलंका को जमीनी स्तर पर सहायता प्रदान करने के साथ ही 45 करोड़ डॉलर के राहत पैकेज की सौगात भी दी है।

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