संघ की कार्यशैली ‘स्वयंसेवक’ के माध्यम से समाज को सशक्त करना : सुनील आंबेकर

नई दिल्ली : दिल्ली में आयोजित शब्दोत्सव 2026 के अंतिम दिन रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ की कार्यशैली का मूल आधार स्वयंसेवक केे माध्यम से समाज को सशक्त एवं जागरूक करना है।

 

दिल्ली में रविवार को तीन दिवसीय उत्सव के अंतिम दिन इस मंच से कई वक्ताओ ने अलग- अलग विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम के तीसरे दिन पुस्तक लोकार्पण, मीडिया, फिल्म और राजनीति जैसे कई मुद्दे तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। इसमें कई छात्रों ने चित्रकला, मूर्तिकला और संस्कृति श्लोक गायन प्रतियोगिता में भाग लिया।

 

सुनील आंबेकर ने कहा, “संघ सरकार को दोषी ठहराने की प्रवृत्ति से दूर रहता है और इसके स्थान पर अपनी कार्यनीति में ‘स्वयंसेवक प्रथम’ के सिद्धांत को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।”

 

संघे शक्ति कलयुगे विषय पर उन्होंने कहा कि संघ का पहला कदम अपने कार्यकर्ताओं को समस्याग्रस्त क्षेत्रों में उतारकर कार्य करने के लिए प्रेरित करना होता है। इसके बाद नागरिकों को इस सामूहिक प्रयास से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।

 

सुनील आंबेकर इस बात पर जोर दिया कि “कोई भी प्रभावी समाधान समाज के सहयोग से ही संभव है, न कि समाज से अलग-थलग रहकर।”

 

इसी मौके पर आरएसएस की शैली पर आधारित पुस्तक ‘संघर्ष समाधान’ के लोकार्पण के दौरान डॉ रतन शारदा और डॉ यशवंत पाठक ने कहा कि संघ जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर, और पंजाब में सांस्कृतिक एकता का एक साझा आधार बनाकर कार्य कर रहा है।

 

उन्होंने कहा कि जब राम जन्मभूमि आंदोलन का सूत्रपात हुआ था, तब सभी राजनीतिक दलों की भाषा विरोध और संदेह से भरी थी। किंतु, जैसे ही ‘लोक-जागरण’ हुआ, व्यापक जनमानस ने इस विषय को भारत की अस्मिता से जोड़कर देखा, जिससे माहौल पूरी तरह परिवर्तित हो गया।

 

आज ‘संघ शक्ति कलियुगे’ और ‘देश की आंतरिक एवं बाहरी रक्षा पर उद्बोधन’ जैसे समसामयिक एवं वैचारिक सत्र आयोजित किये गए।

 

इस मौके पर तीन दिन में 40 से अधिक पुस्तकों का लोकार्पण, छह बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम, दो बड़े कवि सम्मेलन, ओपन माइक (युवाओं के लिए), विभिन्न प्रकाशनों के बुक स्टॉल (सुरुचि, प्रभात, गरुण आदि), भोजन के फूड स्टॉल, 100 से अधिक वक्ता और कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हुए।

 

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