नई दिल्ली : साल 2026 के पहले दो कारोबारी दिन में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) 2025 की तरह एक बार फिर बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने हुए नजर आ रहे हैं। साल 2026 के पहले दो कारोबारी दिन यानी 1 जनवरी और 2 जनवरी को ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 7,608 करोड़ रुपये की निकासी कर ली है। इसके पहले साल 2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रिकॉर्ड 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी।
बताया जा रहा है कि एफपीआई ने पिछले साल ग्लोबल ट्रेड टेंशन, रुपये की चाल में आई कमजोरी, अमेरिकी टैरिफ को लेकर बने तनाव और हाई मार्केट वैल्यूएशन के कारण लगातार बिकवाली का दबाव बनाए रखा था। साल 2025 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जनवरी और फरवरी में लगातार बिकवाली की थी। इसके बाद मार्च से लेकर जून तक एफपीआई खरीदार (बायर) की भूमिका में बने रहे, लेकिन जुलाई से एक बार फिर स्थिति बदल गई। जुलाई से लेकर दिसंबर तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बनाए रखा। राहत की बात यही रही कि इस अवधि में घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार लिवाल बने रहे। डीआईआई की आक्रामक अंदाज में की गई खरीदारी के कारण घरेलू शेयर बाजार 2025 के शुरुआती महीनों में कुछ समय के लिए जरूर डगमगाया, लेकिन बाद में इसकी स्थिति सुधरती गई।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के जवाब में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने योजनाबद्ध तरीके से खरीददारी करके न केवल बाजारों को सहारा दिया, बल्कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने का रास्ता भी दिखाया। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के कारण ही एक दिसंबर 2025 को सेंसेक्स ने 86,159.02 अंक के स्तर तक पहुंच कर मजबूती का नया रिकॉर्ड बनाया। इसी तरह निफ्टी भी इसी दिन 26,325.80 अंक के नए ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुंचने में सफल रहा। इसके बाद डीआईआई की खरीदारी के कारण ही 2 जनवरी 2026 को निफ्टी 26,340 अंक तक पहुंच कर एक बार फिर ऑल टाइम हाई का नया रिकॉर्ड बनाने बनाने में सफल रहा।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैश्विक तनाव, रुपये की कमजोरी और अमेरिकी टैरिफ की चिंता की वजह से विदेशी निवेशक भले भारतीय बाजार में बिकवाल की भूमिका में बने हुए हैं, लेकिन उनकी बिकवाली का जवाब जिस तरह से डीआईआई ने खरीदारी करके दिया है, उससे ये साफ हो गया है कि अब घरेलू शेयर बाजार आत्मनिर्भर हो चुका है। विदेशी निवेशक अब घरेलू शेयर बाजार को अपनी मनमर्जी के मुताबिक उठाने या गिराने में सफल नहीं हो सकते।
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