पोंगल उत्सव: मदुरै में जल्लीकट्टू प्रतियोगिता की जोरदार तैयारी, मुख्यमंत्री स्टालिन भी होंगे शामिल

मदुरै : तमिलनाडु के मदुरै में पोंगल पर्व के अवसर पर गुरुवार से विश्व प्रसिद्ध अवनियापुरम, पालमेडु और अलंगानल्लूर जल्लीकट्टू प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं।

 

ताई महीने (तमिल सौर कैलेंडर का एक महीना) के पहले दिन पोंगल पर्व पर 15 जनवरी को अवनियापुरम में, 16 जनवरी को पालमेडु में और 17 जनवरी को अलंगानल्लूर में पारंपरिक जल्लीकट्टू प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। पालमेडु में 16 जनवरी को होने वाली जल्लीकट्टू प्रतियोगिता में तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन शामिल होंगे, जबकि 17 जनवरी को अलंगानल्लूर में आयोजित प्रतियोगिता में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की उपस्थिति रहेगी।

 

पोंगल पर्व के तहत मदुरै में आयोजित होने वाली पहली जल्लीकट्टू प्रतियोगिता अवनियापुरम जल्लीकट्टू के लिए अंतिम चरण की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। मदुरै नगर निगम ने लगभग 67 लाख रुपये की लागत से प्रतियोगिता स्थल पर मंच निर्माण, बैलों की स्वास्थ्य जांच के लिए विशेष स्थान, प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बैलों को क्रमबद्ध करने के लिए अवरोधक बाड़ तथा अवनियापुरम–तिरुपरंकुन्द्रम सड़क के दोनों ओर लोहे की बैरिकेड्स लगाने का कार्य किया है। अब तक तैयारियों का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

 

बैलों और खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मैदान में नारियल के रेशों की बिछावट, बैलों को एकत्र करने के लिए विशेष क्षेत्र की व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षात्मक उपाय तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। इसके साथ ही मदुरै नगर निगम की ओर से पेयजल, चलित शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक बैलों को मैदान में उतारने के उद्देश्य से नया ‘तल्लुवाड़ी’ वाडीवासल बनाया गया है, जिसका रंगाई-पुताई का कार्य फिलहाल जारी है।

 

मदुरै जिले में आयोजित होने वाला अवनियापुरम जल्लीकट्टू विश्व प्रसिद्ध है। इस पारंपरिक प्रतियोगिता को देखने के लिए न केवल स्थानीय लोग, बल्कि देश-विदेश से भी लाखों दर्शक मदुरै पहुंचते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है।

 

उल्लेखनीय है कि जल्लीकट्टू पोंगल उत्सव का अभिन्न हिस्सा है और तमिलनाडु में प्राचीन काल से सांडों को वश में करने का एक पारंपरिक खेल रहा है। इतिहासकारों के अनुसार, जल्लीकट्टू का आरंभ ईसा पूर्व 400 से 100 वर्ष के बीच माना जाता है। भारत में इसे “आयर” नामक समुदाय द्वारा खेला जाता था। “जल्ली” (चांदी और सोने के सिक्के) तथा “कट्टू” (बांधना) शब्दों से ही ‘जल्लीकट्टू’ नाम की उत्पत्ति हुई है।————–

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