नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने भारत और अमेरिका के बीच समझौते को किसानों के हित में बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है और कहा है कि इस समझौते में एक ओर जहां भारत के किसानों के हितों का दृढ़तापूर्वक संरक्षण किया गया है वहीं दूसरी ओर भारत के लघु और मध्यम उद्योग के उद्यमियों के लिए विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के द्वार खुल गए हैं।
शनिवार को भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते का प्रारूप अब वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जी ने प्रस्तुत कर दिया है।
अब इसके बारे में किसी भी प्रकार के भ्रम की संभावना नहीं रह गई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने पूरी परिपक्वता, पूरी दृढ़ता के साथ भारत की हितों को सुदृढ़ करते हुए स्पष्ट रूप से कृषि, दुग्ध व्यवसाय और अन्य क्षेत्र में एक विस्तृत सूची दी है।
इससे स्पष्ट हो गया है कि भारत के किसानों के हितों का दृढ़तापूर्वक संरक्षण किया गया है।
भारत के लघु और मध्यम उद्योग के उद्यमियों के लिए विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के द्वार खोल दिए गए हैं।
इसके लिए भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करती है।
यह देश की संपूर्ण जनता के लिए एक बहुत सुखद और अनुकूल अवसर है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ सहित विश्व की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण व्यापार समझौते किए हैं। डॉ. त्रिवेदी ने यह भी कहा कि इस समझौते के माध्यम से देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के उद्यमियों के लिए विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के द्वार खुले हैं।
यह देश की संपूर्ण जनता के लिए एक बहुत सुखद और अनुकूल अवसर है।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विगत कुछ महीनों में विश्व की सभी प्रमुख विकसित आर्थिक शक्तियां भारत के साथ व्यापारिक समझौता कर रही हैं। वो भारत के साथ व्यापार करने के लिए लालायित हैं।
आज भारत कुशलता के साथ अपने श्रमिकों, अपने कृषकों, अपने दुग्ध व्यवसायियों के हितों की रक्षा करते हुए भारत को एक नई दिशा में ले जाने की ओर सफल हो रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के हितों को मज़बूती से संरक्षित किया गया है।
इस समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से सुरक्षित रखा गया है। इसका अर्थ यह है कि मोटे अनाज जैसे मिलेट्स, ज्वार, बाजरा, घरेलू सोना तथा अन्य सूचीबद्ध उत्पादों पर किसी भी प्रकार का विदेशी आयात दबाव नहीं पड़ेगा।
यह समझौता इस बात को स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत के किसानों, डेयरी क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की गई है।
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