राज्य सभा में बोले शिवराज सिंह, मोदी युग में कृषि और किसानों का समग्र विकास

नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्यसभा में सांसदों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता सुख के लिए नहीं बल्कि किसान, गांव और गरीब के सर्वांगीण विकास के लिए है। उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता है। इसी सोच के साथ एमएसपी, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, पीएम-कुसुम, पराली प्रबंधन और फसल विविधीकरण जैसी नीतियां जमीन पर बदलाव ला रही हैं।

 

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता सत्ता के स्वर्ण सिंहासन पर आरूढ़ होकर सत्ता सुख के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण, किसानों के कल्याण, दरिद्र नारायण की सेवा और आत्मनिर्भर–विकसित भारत के निर्माण के लिए राजनीति करते हैं। नरेंद्र मोदी ने एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संरचनाएं बनाने का ऐतिहासिक फैसला किया ताकि किसानों के उत्पाद को सुरक्षित रखा जा सके। इस योजना के अंतर्गत 44,243 कस्टम हायरिंग सेंटर, 25,854 प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर, 25,565 फार्म हार्वेस्ट ऑटोमेशन यूनिट, 17,779 वेयरहाउस, 4,201 सॉर्टिंग और ग्रेडिंग यूनिट, स्मार्ट और प्रिसीजन एग्रीकल्चर के लिए 3,549 इंफ्रास्ट्रक्चर और 2,827 कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जा चुके हैं। इन आधुनिक संरचनाओं के कारण फसल, फल और सब्जियों के नुकसान में 5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक कमी आई है और किसान अब अपना उत्पाद सुरक्षित रखकर बेहतर दाम हासिल कर पा रहे हैं।

 

शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि सभी देशवासी भारत मां के लाल हैं, भेदभाव का सवाल ही नहीं उठता और पंजाब की महान जनता को प्रणाम करते हुए आश्वस्त किया कि मोदी सरकार पंजाब की प्रगति और विकास में कोई कोर–कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने बताया कि पंजाब में एआईएफ के तहत 32,014 आवेदन आए और प्रारंभिक लक्ष्य 7,425.98 करोड़ रुपये के मुकाबले 11,351.54 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ स्वीकृत की गईं, जिनसे बेहतर स्टोरेज, प्रोसेसिंग और मशीनीकरण से 5 प्रतिशत से 15 प्रतिशथ तक नुकसान में कमी आई और एक–एक परियोजना से 4 से 9 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, जिससे लाखों रोजगार पैदा हुए।

 

तमिलनाडु के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ समान रूप से पूरे देश में लागू है, अच्छे बीज, क्लस्टर आधारित उत्पादन, डेमोंस्ट्रेशन प्लॉट, प्रति हेक्टेयर 10,000 रुपये तक सहायता, खरीदी और दाल मिलों के लिए सहायता जैसे हर घटक तमिलनाडु में भी मिलेगा और राज्य सरकार के साथ मिलकर दाल उत्पादन बढ़ाने को लेकर केंद्र प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार के 10 साल में मात्र 6 लाख मीट्रिक टन दलहन खरीदा गया, जबकि मोदी सरकार ने 1 करोड़ 92 लाख मीट्रिक टन दलहन की खरीद की है, उन्होंने घोषणा की कि तुअर, मसूर और उड़द की 100 प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित की जाएगी, किसान जितना उत्पादन करेगा और बेचना चाहेगा, केंद्र सरकार पूरी मात्रा खरीदेगी।

 

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार का पहला लक्ष्य गेहूं और चावल में आत्मनिर्भरता था, जिसे हासिल कर आज भारत चावल और गेहूं दोनों का निर्यात कर रहा है और चावल के उत्पादन में 15 करोड़ टन के साथ चीन को पीछे छोड़कर विश्व में नंबर एक हो चुका है। उन्होंने माना कि चावल में पानी की खपत बहुत अधिक है, इसलिए कम समय और कम पानी वाली किस्मों का विकास और डायरेक्ट सीडेड राइस को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें खेत में स्थायी रूप से पानी भरने की आवश्यकता नहीं रहती।

 

इसके समानांतर, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फसल विविधीकरण कार्यक्रम के तहत दलहन, तिलहन, मोटे एवं पोषक अनाज, मक्का, जौं, कपास और कृषिवानिकी जैसी वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और राज्य सरकारों के माध्यम से दलहन के लिए 9,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, मक्का व जौं के लिए 7,500 रुपये , हाइब्रिड मक्का के लिए 11,500 रुपये और पोषक अनाजों के लिए 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता दी जा रही है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com