नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि एआई में स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों पर बोझ कम करने और चिकित्सक-रोगी संबंध को मजबूत करने की क्षमता है, न कि उसे प्रतिस्थापित करने की। उदाहरण देते हुए, उन्होंने एआई-आधारित डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग के लिए मधुनेत्रएआई, तपेदिक का पता लगाने के लिए एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे और कफ अगेंस्ट टीबी (सीए-टीबी) जैसे ध्वनिक स्क्रीनिंग उपकरणों और तेजी से महामारी संबंधी अलर्ट के लिए एआई-एकीकृत निगरानी प्रणालियों का उल्लेख किया। सोमवार को स्वास्थ्य सचिव केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के अंतर्गत “सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव के लिए एआई का विस्तार: सार्वजनिक-निजी भागीदारी” विषय पर एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा में बोल रही थीं।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य और कल्याण के उच्चतम संभव मानक को प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य ब्लूप्रिंट के माध्यम से खुले मानकों, परस्पर सुगमता, गोपनीयता-आधारित डिजाइन और जनरेटिव एआई सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देकर और कार्यान्वित किया गया।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें 85.9 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट खाते 87.8 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से जुड़े हुए हैं। देश भर में 1.80 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म को एकीकृत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एआई-सहायता प्राप्त क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम द्वारा संचालित ई-संजीवनी ने 2.2 लाख से अधिक पंजीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के माध्यम से 44.9 करोड़ से अधिक टेलीकंसल्टेशन को सक्षम बनाया है, जिससे यह प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में विश्व की सबसे बड़ी टेलीमेडिसिन पहल बन गई है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्वास्थ्य सेवा वितरण में दक्षता को काफी हद तक बढ़ा सकती है और विशेष रूप से बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में त्वरित, डेटा-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बना सकती है। उन्होंने कहा कि एआई-संचालित विश्लेषण लाभार्थियों की पहचान को मजबूत कर सकता है, दावों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित कर सकता है, धोखाधड़ी का पता लगा सकता है और सेवा उपयोग की निगरानी कर सकता है। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और समग्र प्रणाली प्रदर्शन में सुधार होगा।
उन्होंने एआई समाधानों के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए मजबूत डेटा प्रबंधन और गोपनीयता सुरक्षा उपायों द्वारा समर्थित अंतरसंचालनीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने के महत्व पर जोर दिया।
पैनल चर्चा में भविष्यसूचक विश्लेषण, प्रारंभिक रोग पहचान, टेलीमेडिसिन, स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की वास्तविक समय की निगरानी के लिए एआई का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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