कोलकाता : डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (डीजीएस) ने शुक्रवार को पटना में मर्चेंटाइल मरीन डिपार्टमेंट (एमएमडी) कार्यालय और एक सीफेरर्स आउटरीच सेंटर का शुभारंभ किया। यह संस्था पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने कोलकाता से वर्चुअल माध्यम से किया।
इस अवसर पर कोलकाता स्थित नाविक गृह समिति और मरीन क्लब के पुनर्निर्माण कार्य की भी शुरुआत की गई। साथ ही कोलकाता में ‘सीफेरर्स रिक्रूटमेंट एंड वेलफेयर’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में मंत्रालय के सचि, डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग, अतिरिक्त डायरेक्टर जनरल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
अधिकारियों के अनुसार, पटना में एमएमडी कार्यालय खुलने से पूर्वी भारत के नाविकों को प्रमाणपत्र जारी करने, दस्तावेजी सहायता, शिकायत निवारण और कल्याणकारी सेवाएं अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। इससे विशेष रूप से बिहार और आसपास के राज्यों के नाविकों को सीधा लाभ मिलेगा। संगोष्ठी में करीब 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें कार्यरत नाविक, कैडेट, जहाज मालिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिप मैनेजर, आरपीएसएल कंपनियां, श्रमिक संगठन और सरकारी प्रतिनिधि शामिल थे।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने गंगा नदी के नीचे सुरंग निर्माण के प्रस्ताव पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्यामाप्रसाद मुखर्जी पोर्ट प्राधिकरण के अध्यक्ष ने इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को प्रस्ताव सौंपा है। योजना के तहत कोलकाता से सांकराइल तक लगभग 15 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी, जिसमें करीब सात किलोमीटर हिस्सा सुरंग के रूप में विकसित किया जाएगा। हालांकि, परियोजना को अभी केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
हुगली जिले के बलागढ़ में जेटी निर्माण परियोजना पर मंत्री ने कहा कि वहां कार्य तेजी से जारी है। सड़क निर्माण और पर्यावरण संबंधी मंजूरियां मिल चुकी हैं और फिलहाल पोर्ट प्राधिकरण की भूमि पर काम चल रहा है।
वहीं, कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना के संबंध में उन्होंने बताया कि कुछ परिस्थितिजन्य चुनौतियों के कारण कार्य की प्रगति धीमी है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि देश की समुद्री व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए नाविकों और जहाज कर्मियों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) के चलते मतुआ समुदाय के किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा और सभी पात्र नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।——-
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