स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रिय संगठनों ने एचपीवी टीकाकरण को लेकर जारी किया परामर्श

नई दिल्ली : गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव के लिए आज से शुरू हुए टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर स्वास्थ्य से जुड़े कई संगठनों ने मिलकर इसका समर्थन करते हुए परामर्श जारी किया।

 

इन संस्थानों में भारतीय बाल रोग अकादमी (आईएपी), भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए), भारतीय प्रसूति एवं स्त्रीरोग सोसायटी संघ (एफओजीएसआई), भारतीय निवारक एवं सामाजिक चिकित्सा संघ (आईएपीएसएम), भारतीय जन स्वास्थ्य संघ (आईपीएचए) और स्टिलबर्थ सोसायटी ऑफ इंडिया (एसबीएसआई) शामिल है।

 

इन संस्थानों ने शनिवार को परामर्श जारी कर कहा कि एचपीवी वैक्सीन उन वायरस प्रकारों से संक्रमण को रोकता है जो अधिकांश सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं।

 

वैक्सीन में जीवित वायरस नहीं होता है और यह संक्रमण का कारण नहीं बन सकता है।

 

इन संस्थानों ने साफ किया कि एचपीवी वैक्सीन और बांझपन के बीच संबंध स्थापित करने वाला कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

 

संयुक्त राज्य अमेरिका में दी गई 13.5 करोड़ से अधिक खुराकों सहित वैश्विक सुरक्षा डेटा इसकी मजबूत सुरक्षा की पुष्टि करता है।

 

यह वैक्सीन 9-14 वर्ष की आयु के बीच सबसे अच्छा काम करती है।

 

160 से अधिक देशों ने एचपीवी वैक्सीन को अपने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल किया है।

 

इन संस्थानों ने जारी अपने एक संदेश में कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम वाले देशों में सर्वाइकल कैंसर में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। सरकार 14 वर्ष की आयु की सभी लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन मुफ्त में प्रदान कर रही है। स्वास्थ्य संस्थानों को सभी लाभार्थियों को इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके साथ महिलाओं को नियमित रूप से गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच कराने के साथ प्रमाणित चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी है। इसके साथ समुदाय में टीकाकरण को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता प्रयासों का समर्थन करना चाहिए।

 

संस्थानों ने कहा कि गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है। विश्व स्तर पर

 

2022 में निम्न और मध्यम आय वाले देशों में लगभग 350,000 महिलाओं की गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से मृत्यु हुई। ग्लोबोकैन की रिपोर्ट के अनुसार 2022 में भारत में 1.27 लाख से अधिक नए मामले और लगभग 80,000 मौतें दर्ज की गईं। अधिकांश मामले ह्यूमन पैपिलोमावायरस के लगातार संक्रमण के कारण होते हैं।

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