नई दिल्ली : फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित रायसीना डॉयलॉग में भारत की विदेश नीति की प्रशंसा की और उसे व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को दिखाया है कि रणनीतिक सतर्कता और स्वायत्तता की रक्षा का क्या अर्थ होता है। साथ ही बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग का भी समर्थन किया है। “अब समय आ गया है कि हम सभी थोड़ा-बहुत भारत की तरह बनें।”
रायसीना डॉयलॉग भारत का प्रमुख वैश्विक भू-राजनीतिक सम्मेलन है। इसका आयोजन हर वर्ष नई दिल्ली में होता है। इसमें विभिन्न देशों के नेता, नीति-निर्माता, विद्वान और विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शाम नई दिल्ली में रायसीना संवाद के 11वें संस्करण का उद्घाटन किया। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत के इस प्रमुख सम्मेलन में मुख्य भाषण दिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति स्टब ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया और कहा कि फिनलैंड की खुशहाली और भारत के आशावाद को मिलाकर एक अधिक न्यायपूर्ण और स्थिर वैश्विक व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है।
इसमें उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति को व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण पर आधारित रखा है। इसे गुटनिरपेक्षता कहें या बहु-गठबंधन भारत ने किसी एक सहयोगी या गुट की सद्भावना पर पूरी तरह निर्भर न रहने का ध्यान रखा। अपनी सुरक्षा में निवेश किया है और कई दिशाओं में सक्रिय रूप से साझेदारी विकसित की।
उन्होंने कहा, “वैश्विक शांतिरक्षा अभियानों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक होने के नाते, बहुपक्षवाद की रक्षा करना आपके (भारत) के स्वभाव में निहित है।”
राष्ट्रपति स्टब ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को यह दिखाया है कि निष्क्रियता कोई रणनीति नहीं होती। किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन का हिस्सा न होते हुए भी भारत खुद को अलग-थलग नहीं रखता, बल्कि सक्रिय कूटनीतिक सहभागिता के जरिए अपनी भूमिका निभाता है।
फिनलैंड के राष्ट्रपति ने यूरोपीय संघ और भारत के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच विकसित हो रही साझेदारी वैश्विक स्तर पर एक उदाहरण बन सकती है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की पहल की सराहना की और कहा कि यदि एआई को साझा किया जाए तो यह पूरी दुनिया के लिए लाभकारी हो सकता है।
उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर की इस बात पर सहमती व्यक्त की कि हमें यह समझना होगा कि यूक्रेन, मध्य पूर्व और सूडान, और अन्य अनेक युद्ध और संघर्ष सभी हमारी समस्याएँ हैं। हमें इन्हें सुलझाने के लिए मिलकर काम करना होगा।
राष्ट्रपति ने भारत को एआई और प्रौद्योगिकी का प्रेरक और सेतु दोनों बताया और कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट में देश ने नेतृत्व दिखाया।
रायसीना संवाद के उद्घाटन समारोह में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के विश्व के दूरदर्शी और आशावादी विश्लेषण की सराहना की।
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