नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा व्यक्त नाराजगी एवं पीड़ा के बाद राज्य की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और इस सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखते हैं, वे इस घटना से बेहद आहत और निराश हैं।
उन्होंने कहा कि स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त दर्द और पीड़ा ने देशवासियों के मन को गहरी ठेस पहुंचाई है। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस मामले में सारी सीमाएं पार कर दी हैं और राज्य का प्रशासन राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए जिम्मेदार है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संथाली संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इतनी लापरवाही से लिया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और इस सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए।
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाली कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में कहा कि सम्मेलन ऐसे स्थान पर आयोजित किया गया, जहां संथाली समुदाय के लोग पहुंच ही नहीं सके, जिससे उन्हें गहरा दुख हुआ।
उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर वे मौजूद थीं, वहां विशाल क्षेत्र है और वहां लाखों लोग एकत्र हो सकते थे, लेकिन प्रशासन ने सम्मेलन के लिए ऐसा स्थान चुना जो दूर और सीमित था।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जब किसी स्थान पर राष्ट्रपति का दौरा होता है तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी वहां मौजूद रहना चाहिए, लेकिन इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उपस्थित नहीं थीं। उन्होंने कहा कि वह भी बंगाल की बेटी हैं और ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन की तरह मानती हैं, लेकिन इस घटना से उन्हें काफी दुख हुआ।
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