दोस्ती की ढाल : महायुद्ध के बीच ईरान का भारत को बड़ा तोहफा, भारतीय जहाजों के लिए खुला रहेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

New Delhi : पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच मचे भीषण सैन्य घमासान के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जारी तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों को वहां से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिल सकती है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने इसके पुख्ता संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की उम्मीदें जाग गई हैं।

 

भारत हमारा मित्र है: राजदूत फतहाली का बड़ा बयान

फारस की खाड़ी में बढ़ते युद्ध के खतरों और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के बीच राजदूत फतहाली ने पत्रकारों से बेहद सकारात्मक बात की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) मिलेगा क्योंकि भारत ईरान का एक पुराना और भरोसेमंद मित्र है। राजदूत ने यहां तक दावा किया कि इस संबंध में सकारात्मक घटनाक्रम अगले दो से तीन घंटों के भीतर ही दुनिया के सामने आ सकते हैं।

 

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य का यह रास्ता?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह संकरा समुद्री गलियारा है जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। वर्तमान संघर्ष के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है, जिससे भारत में एलपीजी और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का डर बना हुआ था। ऐसे में ईरान का यह ‘दोस्ती वाला हाथ’ भारत की इकोनॉमी के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।

 

भारत और ईरान: साझा हित और अटूट विश्वास

राजदूत ने नई दिल्ली और तेहरान के बीच के गहरे संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के क्षेत्र में समान हित हैं। उन्होंने मुश्किल समय में ईरान को मिले भारत के समर्थन को याद करते हुए कहा कि भारत सरकार ने युद्ध जैसी स्थितियों के बाद विभिन्न क्षेत्रों में उनकी काफी मदद की है। फतहाली ने भरोसा जताया कि दोनों देश एक-दूसरे के साथ मिलकर न केवल व्यापार, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी काम कर सकते हैं।

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