इस्लामाबाद : अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) के एक तीखे बयान ने दक्षिण एशिया की राजनीति में भूचाल ला दिया है। गबार्ड द्वारा पाकिस्तान को अमेरिका के लिए ‘संभावित परमाणु खतरा’ बताए जाने पर इस्लामाबाद बुरी तरह भड़क गया है। अपनी सफाई में पाकिस्तान ने न केवल इन आरोपों को खारिज किया, बल्कि अपनी परमाणु नीति का बचाव करने के लिए एक बार फिर भारत का कार्ड खेला है।
तुलसी गबार्ड का वो बयान जिससे मचा हड़कंप
अमेरिकी खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने हाल ही में एक रणनीतिक रिपोर्ट में पाकिस्तान को उन देशों की सूची में रखा था, जिनके परमाणु हथियार अमेरिका और वैश्विक सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। गबार्ड के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की साख के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा पर सवाल उठाए गए हैं।
पाकिस्तान की सफाई: “हमारी मिसाइलें अमेरिका तक नहीं पहुंचतीं”
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ताहिर हुसैन अंद्राबी ने गबार्ड के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने अपनी सफाई में निम्नलिखित तर्क दिए हैं:
रक्षात्मक प्रोग्राम: पाकिस्तान का दावा है कि उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह से ‘डिफेंसिव’ (रक्षात्मक) है और किसी तीसरे देश के लिए खतरा नहीं है।
रेंज का तर्क: अंद्राबी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के पास कोई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) नहीं है, जो अमेरिका तक मार कर सके। उनकी मिसाइलें क्षेत्रीय डिटरेंस के लिए ही डिजाइन की गई हैं।
डिटरेंस नीति: पाकिस्तान ने दोहराया कि उसकी परमाणु रणनीति ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ पर आधारित है, जिसका एकमात्र उद्देश्य भारत के साथ सैन्य संतुलन बनाए रखना है।
भारत को घसीटने की कोशिश: “दुनिया भारत की क्षमता क्यों नहीं देखती?”
हमेशा की तरह, पाकिस्तान ने अपनी कमियां छिपाने के लिए भारत की मिसाइल क्षमता पर सवाल उठाए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि दुनिया भारत की उन लंबी दूरी की मिसाइलों (जैसे अग्नि सीरीज) पर चुप्पी साधे हुए है, जो कई महाद्वीपों तक मार कर सकती हैं। पाकिस्तान ने इसे ‘क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन’ के लिए खतरा बताते हुए अमेरिका से अपनी निष्पक्षता साबित करने को कहा।
विशेषज्ञों की राय: क्यों डरा हुआ है पाकिस्तान?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तुलसी गबार्ड का बयान राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की उस सख्त विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें परमाणु प्रसार और आतंकी संगठनों के हाथों में परमाणु सामग्री जाने के खतरों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाया जा रहा है। पाकिस्तान को डर है कि इस तरह के बयानों से उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लग सकते हैं या उसके परमाणु प्रोग्राम की निगरानी और सख्त की जा सकती है।
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