पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके वैश्विक असर को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम एक उच्च स्तरीय मंत्री-स्तरीय बैठक बुलाई है, जिसमें पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देशभर में ऊर्जा और जरूरी संसाधनों की निर्बाध आपूर्ति, स्थिर लॉजिस्टिक्स और प्रभावी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करना है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सरकार उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए वैश्विक हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठा रही है।
इससे पहले 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, जो एक तरह से राष्ट्रीय क्षमता और धैर्य की परीक्षा है। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए शांति, संयम और जन-जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में आई बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं से संपर्क साधा है। उन्होंने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान के नेताओं से फोन पर बातचीत कर हालात पर चर्चा की है। वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित किए जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है, ऐसे में इस क्षेत्र में जारी तनाव का असर पूरी दुनिया के साथ भारत पर भी पड़ रहा है।
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