नई दिल्ली : राज्यसभा सदस्य हर्ष वर्धन श्रृंगला ने बुधवार को संसद में मानव और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व के लिए एक व्यापक और संवेदनशील दृष्टिकोण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में उसके नागरिकों और उसकी प्राकृतिक विरासत, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ऐसा देश होने के नाते जो वैश्विक जैव विविधता प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है और ‘ग्लोबल बिग कैट अलायंस’ की मेजबानी कर रहा है, भारत की यह जिम्मेदारी है कि वह यह साबित करे कि विकास और पारिस्थितिक संतुलन साथ-साथ चल सकते हैं।
श्रृंगला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथन को याद किया, जिसमें उन्होंने संरक्षण को राष्ट्र की संस्कृति का एक अभिन्न अंग बताया है। उन्होंने कहा कि असम में हाल ही में एक ट्रेन की चपेट में आने से सात हाथियों की मौत की घटना एक कड़वी याद दिलाती है कि विकास की कीमत जान नहीं हो सकती और उन्होंने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में अधिक संवेदनशील योजना बनाने का आह्वान किया। उन्होंने ‘काजीरंगा मॉडल’ की ओर इशारा किया जहां बुनियादी ढांचे के विकास को जारी रखते हुए वन्यजीवों की आवाजाही को बहाल करने के लिए ऊंचे गलियारे विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने संरक्षण के क्षेत्र में भारत द्वारा प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग को भी रेखांकित किया; जिसमें गंगा नदी डॉल्फिन की सैटेलाइट-टैगिंग, हाथियों की पहली डीएनए- आधारित जनगणना और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल तथा स्लॉथ बीयर जैसी प्रजातियों के लिए विशेष संरक्षण प्रयास और साथ ही चीता पुनर्स्थापन (ट्रांसलोकेशन) की पहलें शामिल हैं।
श्रृंगला ने संवेदनशील गलियारों में ‘वन्यजीव-संवेदनशील विशेष क्षेत्र’ बनाने, ग्राम पंचायतों और जैव विविधता निकायों को शामिल करते हुए ‘स्थानीय संरक्षण परिषदों’ का गठन करने और हाथियों के रास्तों से गुजरने वाली ट्रेनों में (विशेषकर उत्तरी बंगाल और असम में) एआई-सक्षम घुसपैठ-पहचान प्रणालियों को तैनात करने का प्रस्ताव भी रखा।
उन्होंने कहा कि अब भारत को विकास का एक ऐसा मॉडल बनाकर वैश्विक स्तर पर एक मिसाल कायम करनी चाहिए, जहां मानवता और प्रकृति दोनों साथ-साथ फलें-फूलें और जिसकी नींव करुणा तथा नवाचार, दोनों पर टिकी हो।
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