नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने अगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा बैठक का कैलेंडर जारी कर दिया है। आरबीआई की पहली तीन दिवसीय द्विमासिक एमपीसी समीक्षा बैठक 6 से आठ अप्रैल को होगी।
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय दर निर्धारण समिति अगले वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2026-27 में कुल छह बैठकें करेगी। केंद्रीय बैंक की ओर से यह घोषणा आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45ZI के तहत की गई है, जिसके अनुसार रिजर्व बैंक को नीतिगत बैठकों का कैलेंडर प्रकाशित करना अनिवार्य है। रिजर्व के मुताबिक यह बैठकें इसलिए होंगी, ताकि व्यापक आर्थिक स्थितियों की समीक्षा की जा सके और नीतिगत दरों और तरलता उपायों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकें। पहली बैठक 6 से आठ अप्रैल को होगी।
आरबीआई की दूसरी मौद्रिक समीक्षा बैठक 3 से पांच जून तक होगी। इसके बाद 3, 4 और 5 अगस्त को तीसरी 5, 6 और 7 अक्टूबर को चौथी, 2, 3 और 4 दिसंबर को पांचवीं तथा 3, 4 और 5 फरवरी, 2027 को छठी तीन दिवसीय की बैठकें आयोजित की जाएंगी। आमतौर पर एमपीसी की समीक्षा बैठक के तीसरे दिन समिति प्रस्ताव पर मतदान करती है और मतदान पूरा होने के बाद रिजर्व बैंक गवर्नर निर्णय की घोषणा करते हैं। मौद्रिक नीति समिति में कुल छह सदस्य होते हैं। एमपीसी महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट तय करने का काम करती है। इसमें तीन आरबीआई अधिकारी (गवर्नर सहित) और तीन बाहरी सदस्य शामिल हैं, जिन्हें केंद्र सरकार नियुक्त करती है।
एमपीसी की समीक्षा बैठकों पर शेयर बाजारों की नजर रहती है, क्योंकि इनमें नीतिगत रेपो रेट निर्धारित की जाती है और मुद्रास्फीति और विकास पर केंद्रीय बैंक का रुख स्पष्ट किया जाता है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 4 से 6 फरवरी को अपनी बैठक में सर्वसम्मति से नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा था।
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