नई दिल्ली : राज्यसभा ने बुधवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस विधेयक को पहले ही लोकसभा ने 30 मार्च को मंजूरी दी थी। इस संशोधन का उद्देश्य दिवालियापन प्रक्रियाओं को तेज़ करना, मामलों के बैकलॉग को कम करना और भारत के वित्तीय तंत्र को मजबूत करना है।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आईबीसी ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर की सेहत में सुधार किया है और संपत्तियों की वसूली में मदद की है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चयन समिति की सभी 11 सिफारिशें सरकार द्वारा स्वीकार की गई हैं, साथ ही कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की एक अतिरिक्त सिफारिश भी जोड़ी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि इन्सॉल्वेंसी और बैंकक्रप्सी कोड विधेयक का उद्देश्य कंपनियों को बंद करना या उन्हें लिक्विडेट करना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कानून कंपनियों के सामने मौजूद वित्तीय दबाव और तनाव को दूर करने के लिए लाया गया है।
मंत्री ने बताया कि इसका मकसद यह है कि जो कंपनियां अस्थिर स्थिति में हैं, उन्हें आवश्यक समाधान और प्रक्रिया प्रदान की जाए, जिससे वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें और फिर से उस स्तर पर पहुंचें जिस पर वे पहले सुचारू रूप से संचालित हो रही थीं।
निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि संशोधन के बाद आईबीसी और अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी होगा, जिससे न केवल कंपनियों को राहत मिलेगी बल्कि लेनदारों और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा।
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