जनगणना-2027 की शुरुआत, डिजिटल स्व-गणना के साथ दुनिया का सबसे बड़ा सर्वे अभियान आरंभ

नई दिल्ली : देश में जनगणना-2027 के तहत विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभियान की औपचारिक शुरुआत बुधवार को हो गई। केंद्र सरकार ने पहले चरण ‘मकानसूचीकरण और मकानों की गणना’ (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन) की शुरुआत करते हुए इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में संचालित करने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि पहली बार नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे स्वयं ऑनलाइन अपने परिवार का विवरण दर्ज कर सकते हैं।

 

देश की परंपरा को कायम रखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सबसे पहले स्व-गणना कर इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया। इसके बाद उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी ऑनलाइन माध्यम से अपनी-अपनी स्व-गणना पूरी की।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने जनगणना को विकास योजनाओं की आधारशिला बताते हुए इसे जनभागीदारी से सफल बनाने पर जोर दिया।

 

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, जनगणना-2027 के प्रथम चरण के तहत मकानसूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच देशभर में किया जाएगा। इस चरण में घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, परिसंपत्तियों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। सरकार के अनुसार, इस चरण के लिए कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे।

 

प्रारंभिक चरण में स्व-गणना की सुविधा आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू की गई है, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के नई दिल्ली नगरपालिका परिषद तथा दिल्ली छावनी बोर्ड क्षेत्र शामिल हैं। पहले ही दिन इन क्षेत्रों से लगभग 55 हजार परिवारों ने स्व-गणना सुविधा का उपयोग किया, जो इस डिजिटल पहल के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता और सहभागिता को दर्शाता है।

 

सरकार के अनुसार, स्व-गणना एक सुरक्षित वेब-आधारित प्रणाली है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। इसके तहत नागरिक अपने मोबाइल नंबर और बुनियादी पहचान संबंधी जानकारी का उपयोग कर निर्धारित पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं। फॉर्म भरने और सबमिट करने के बाद एक यूनिक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी जारी होती है, जिसे बाद में प्रगणक के सत्यापन के समय साझा करना होता है।

 

हालांकि डिजिटल सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद पारंपरिक प्रक्रिया भी जारी रहेगी। प्रगणक पूर्व की जनगणनाओं की तरह निर्धारित क्षेत्रों में घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। इस बार एक नई व्यवस्था के तहत घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिए दी गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वयं अपना डेटा दर्ज कर सकें और प्रक्रिया को तेज एवं सटीक बनाया जा सके।

 

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्रित सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे और उनका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं नीतिगत उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। डिजिटल जनगणना के लिए उपयोग किए जा रहे प्लेटफॉर्म में उच्च स्तरीय सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं, जिनमें मजबूत एन्क्रिप्शन और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण शामिल हैं।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना-2027 में डिजिटल तकनीक का समावेश न केवल डेटा संग्रह की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाएगा, बल्कि त्रुटियों को भी कम करेगा। इससे सरकार को वास्तविक समय के करीब आंकड़े प्राप्त होंगे, जो भविष्य की योजनाओं और संसाधनों के बेहतर आवंटन में मददगार साबित होंगे।

 

जनगणना को शासन का एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है, क्योंकि इससे प्राप्त आंकड़े अगले दस वर्षों के लिए विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी नीतियों के निर्माण का आधार बनते हैं। ऐसे में सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-गणना के माध्यम से या प्रगणकों को सहयोग देकर इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें।

 

इस प्रकार, जनगणना-2027 का यह डिजिटल और सहभागी मॉडल भारत में डेटा-आधारित शासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो देश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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