नई दिल्ली : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) में जवानों की पदोन्नति का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि इन बलों में शीर्ष पद केवल आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं और यह नीति उन जवानों का मनोबल तोड़ रही है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं।
राहुल गांधी ने एक्स पर साझा किए वीडियो पोस्ट में असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का उदाहरण दिया, जिन्होंने नक्सली मुठभेड़ में आईईडी विस्फोट के दौरान अपना एक पैर खो दिया। उन्होंने कहा कि 15 वर्षों से अधिक सेवा के बावजूद मलिक को प्रमोशन नहीं मिला और अपनी ही फोर्स का नेतृत्व करने का अधिकार नहीं दिया गया। यह केवल एक अफसर की पीड़ा नहीं बल्कि लाखों जवानों का दर्द है, जो सीमाओं पर तैनात रहते हैं, आतंकवाद और नक्सलवाद से लड़ते हैं और चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं।
उन्होंने लिखा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के सवालों और आपत्तियों के बावजूद इस व्यवस्था को स्थायी बनाने पर आमादा है। यह विधेयक केवल करियर रोकने का प्रयास नहीं बल्कि उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की सुरक्षा में सबसे आगे खड़े हैं। जब हमारे सैनिकों का मनोबल टूटता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है।
राहुल गांधी ने वीडियो में कहा कि बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ जैसे बलों की अपनी-अपनी विशेषज्ञता है और इन्हीं अफसरों को नेतृत्व मिलना चाहिए। बाहर से किसी को संगठन के शीर्ष पर बैठाने से उसकी आत्मा और वास्तविकता को समझना संभव नहीं होता। यह मूल रूप से गलत है और कांग्रेस पार्टी इसका विरोध करती रही है।
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