खाड़ी युद्ध के चलते अमेरिका-इजराइल से तेजस के लिए इंजन और रडार की आपूर्ति में देरी

नई दिल्ली : ईरान से युद्ध के बीच अमेरिका और इजराइल से भारत को लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस मार्क-1ए के लिए इंजन, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मिलने में और देरी होने की संभावना बढ़ गई है। अमेरिकी कंपनी ने

 

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को देने के लिए छठा एफ-404 इंजन तैयार कर दिया है, लेकिन आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इंजन की आपूर्ति में लगातार देरी के लिए एचएएल ने जीई एयरोस्पेस पर ‘लिक्विडेटेड डैमेज’ लगाने की शुरुआत की है। इसी तरह इजराइल से रडार के लिए सॉफ्टवेयर नहीं मिल पाया है।

 

एचएएल के चेयरमैन डॉ. डीके सुनील ने गुरुवार को अमेरिका से इंजन आपूर्ति के मुद्दे पर कहा कि हमारे पास 5 इंजन हैं और छठा इंजन अब तैयार है। इसे जल्द ही ले लिया जाएगा। पिछली बार जब मैं जीई एयरोस्पेस गया था, तो भरोसा दिया गया था कि वे हमें इस कैलेंडर साल के दूसरे हाफ में जून से दिसंबर के बीच 20 इंजन देंगे, लेकिन समय पर आपूर्ति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अब लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए इंजन की आपूर्ति में देरी के लिए जीई एविएशन पर ‘लिक्विडेटेड डैमेज’ लगाया गया है और आपूर्ति होने में देरी वाले हर इंजन पर पेनल्टी लगाई जा रही है, क्योंकि इसकी वजह से वायु सेना को सौदे के तहत एयरक्राफ्ट की आपूर्ति में काफी देरी हुई है।

 

चेयरमैन डॉ. सुनील ने युद्ध की वजह से एलसीए तेजस मार्क-1ए के लिए इजराइल से रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम की देरी पर कहा कि रडार के लिए सॉफ्टवेयर आने की वजह से हमें देरी हुई है। इजराइल और ईरान के बीच पिछली लड़ाई में भी यह आपूर्ति थोड़े समय के लिए बंद थी, लेकिन बाद में देरी से सॉफ्टवेयर अपग्रेड भी आए हैं। मौजूदा लड़ाई का आपूर्ति पर कुछ असर पड़ेगा, लेकिन अभी हमारे पास इक्विपमेंट हैं, इसलिए उम्मीद है कि हम बराबरी कर लेंगे। हमें उम्मीद है कि यह लड़ाई भी जल्दी खत्म हो जाएगी और इस देरी का ध्यान रखा जाएगा।

 

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि जीई एयरोस्पेस ने एचएएल को बताया है कि आपूर्ति में देरी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण हो रही है। अमेरिकी कंपनी से 2021 में किए गए 99 एफ 404-आईएन20 इंजनों के लिए सौदा किया गया था, जिसमें से पहला पिछले साल मार्च में और पांचवां दिसंबर में आपूर्ति किया गया था। तेजस मार्क-1ए का पहला विमान मार्च, 2024 में वायु सेना को दिया जाना था, लेकिन दो साल से ज्यादा की देरी के बाद इस साल जून-जुलाई तक ही मिलने की संभावना है।

 

रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच 3 फरवरी 2021 को जब 83 तेजस मार्क-1ए के लिए डील साइन हुई थी, तबसे एचएएल ने कई बार अलग-अलग आपूर्ति की समय सीमा तय की, लेकिन एक भी अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई बार सार्वजनिक मंच से भी इस पर नाराजगी जता चुके हैं। इसके बाद वायु सेना और रक्षा मंत्रालय ने एचएएल को सौदे की शर्तों से कुछ छूट देने पर सहमति जताई है, ताकि तेजस मार्क-1ए की लंबे समय से रुकी हुई आपूर्ति इस वित्त वर्ष में शुरू हो सके। नए समझौते के तहत वायु सेना इस एयरक्राफ्ट को तभी स्वीकार करेगी, जब एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और एचएएल मिसाइल-फायरिंग टेस्ट, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम में रडार का इंटीग्रेशन और वेपन पैकेज पूरा कर लें।—————————-

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