भारतीय नौसेना की बढ़ी धाक: समंदर में अरिदमन का आगाज़, राजनाथ सिंह बोले- यह सिर्फ नाम नहीं; भारत की अजेय शक्ति है

New Delhi : भारतीय नौसेना के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन को राष्ट्र को समर्पित किया। इस पनडुब्बी के बेड़े में शामिल होते ही भारत की समुद्री सीमाएं अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और अभेद्य हो गई हैं। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर उत्साह भरते हुए अपने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर लिखा, “अरिदमन महज एक शब्द नहीं, बल्कि साक्षात शक्ति है।”

 

दुश्मन की रडार से ओझल और मिसाइलों से लैस है ‘अरिदमन’

INS अरिदमन की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज रफ्तार और घातक प्रहार क्षमता है। पानी के भीतर लगभग 44 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली यह पनडुब्बी ‘स्टील्थ’ तकनीक से लैस है, जिसकी वजह से दुश्मन के लिए इसका पता लगाना लगभग नामुमकिन होगा। यह भारत की तीसरी ऐसी पनडुब्बी है जो परमाणु ऊर्जा से संचालित होती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अरिदमन पर तैनात K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइलें इसे समंदर का सबसे खतरनाक शिकारी बनाती हैं। यह भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

 

अरिहंत और अरिघात से भी ज्यादा विशाल और ताकतवर

स्वदेशी एसएसबीएन (SSBN) परियोजना के तहत विकसित INS अरिदमन अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियोंINS अरिहंत और INS अरिघात की तुलना में आकार में बड़ी और मारक क्षमता में कहीं अधिक शक्तिशाली है। जहां अरिहंत को 2016 में और अरिघात को अगस्त 2024 में सेना में शामिल किया गया था, वहीं अरिदमन तकनीक के मामले में एक बड़ी छलांग है। नौसेना के सूत्रों के मुताबिक, इसी श्रृंखला की चौथी पनडुब्बी का समुद्री परीक्षण (Sea Trials) भी अंतिम चरण में है, जिसे अगले साल तक कमीशन किए जाने की पूरी उम्मीद है।

 

युद्धपोत INS तारागिरी का भी हुआ जलवा, ‘मेक इन इंडिया’ की दिखी ताकत

पनडुब्बी के साथ-साथ आज भारतीय नौसेना के बेड़े में स्वदेशी युद्धपोत INS तारागिरी को भी शामिल किया गया। प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित यह चौथा शक्तिशाली युद्धपोत 6,670 टन वजनी है। इसकी सबसे विशेष बात यह है कि इसमें 75 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा तैयार यह फ्रिगेट रडार को चकमा देने वाली आधुनिक ‘स्टील्थ’ तकनीक से लैस है। इसके निर्माण में देश के 200 से अधिक एमएसएमई (MSME) संस्थानों ने योगदान दिया है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की जीती-जागती मिसाल है।

 

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का बढ़ता सामरिक कद

INS अरिदमन और INS तारागिरी की कमीशनिंग ऐसे समय में हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वैश्विक तनाव और सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। पूर्वी तट पर भारत की बढ़ती सक्रियता और इन आधुनिक हथियारों की तैनाती से समुद्री सुरक्षा के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया कि भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए दुनिया पर निर्भर नहीं है, बल्कि खुद अपनी रक्षा के लिए ‘शक्ति’ सृजित कर रहा है।

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