सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौ फीसदी एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने सोमवार को कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की 100 फीसदी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जबकि देश में किसी भी एलपीजी वितरक के यहां स्टॉक खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। पेट्रोल पंपों के पास ईंधन के पर्याप्त स्टॉक मौजूद हैं।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने नई दिल्ली में अंतर-मंत्रालयी प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि पूरे देश में एलपीजी की घरेलू आपूर्ति सामान्य है। उन्होंने कहा कि घरेलू ग्राहकों के लिए एलपीजी सिलेंडरों की नियमित सप्लाई सुनिश्चित की गई है, अभी घरेलू एलपीजी सप्लाई पूरी तरह से सामान्य है।

 

सुजाता शर्मा ने कहा कि किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास घरेलू रसोई गैस की कमी (ड्राई-आउट) की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग का स्टेटस भी लगभग 99 फीसदी तक पहुंच गया है। इसके अलावा गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए ओटीपी-आधारित एलपीजी डिलीवरी सिस्टम लागू किया गया है। सुजाता शर्मा ने कहा कि इस प्रक्रिया में ओटीपी केवल ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही भेजा जाता है। इसलिए, अगर ग्राहक इस कोड को किसी और के साथ शेयर नहीं करता है तो यह सुरक्षित रहता है और कोई दूसरा व्यक्ति इसे एक्सेस नहीं कर सकता।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इसके अलावा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए हर क्षेत्र के लिए न्यूनतम स्टॉक सीमा तय की है, जो 85 फीसदी से 90 फीसदी के बीच है। इस स्तर से ऊपर डिस्ट्रीब्यूशन अप्रूवल क्लीयरेंस (डीएसी) को बाईपास करने के लिए केवल राज्य प्रमुख या क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों से ही मंजूरी लेनी होगी।

 

वहीं, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि अभी फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में भारतीय झंडे वाले किसी भी जहाज़ से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि भारतीय झंडे वाला एलपीजी जहाज ‘जग विक्रम’ 11 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरा है। इस जहाज पर लगभग 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी लदी है और इसमें 24 नाविक सवार हैं। इसके 14 अप्रैल को कांडला पहुंचने की उम्मीद है।

 

भारी उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव डॉ. हनीफ़ कुरैशी ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर आयोजित अंतर मंत्रालयी प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के निर्माण और उन्हें अपनाने को बढ़ावा दे रही है। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक कदम है। पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत तीन-पहिया रिक्शों के लिए सब्सिडी की अंतिम तारीख जो पहले मार्च 2026 तय की गई थी, अब दो साल बढ़ाकर मार्च 2028 कर दी गई है।

 

उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहनों का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं और इनके लिए भी सब्सिडी की अंतिम तारीख तीन महीने बढ़ाकर 31 जुलाई, 2026 तक कर दी गई है। विभिन्न श्रेणियों के ईवी के लिए सब्सिडी के स्तर तय करने हेतु ‘फेज़्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम’ (पीएमपी) का उपयोग किया जाता है। कुरैशी ने कहा कि यह वाहनों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देता है। पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आ रही दिक्कतों को देखते हुए ट्रकों और बसों के लिए पीएमपी दिशा-निर्देशों में अब छह महीने की ढील दी गई है।

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