हमें मोदी पर गर्व है, वे भी संघ से जुड़े होने का गर्व महसूस करते हैं- होसबाले

वाशिंग्टन/नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बारे में हम भारत सरकार की नीति, प्रतिक्रिया और सोच के साथ पूरी तरह खड़े हैं। हमारी अपनी अलग से कोई राय नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में कहा कि हमें उन पर गर्व है और वे भी हमारे संगठने से जुड़े होने पर गर्व करते हैं।

 

वाशिंग्टन (डी.सी.) के सुप्रसिद्ध हड्सन इंस्टीट्यूट के तत्वावधान में आयोजित एक चर्चा-वार्ता में वरिष्ठ पत्रकार और ‘द वॉल स्ट्रीट जरनल’ के स्तंभकार वॉल्टर रसेल मीड से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी, सरकार और संघ से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने यह बात कही। रा.स्व.संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने साफ कहा कि 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के काल से उसके नेता व संगठनकर्ता हमसे जुड़े रहे हैं। संघ विचार से प्रेरित आज 40 से अधिक संगठनों का राष्ट्रव्यापी तंत्र है। उन्होंने अमेरिकी डायसपोरा के कुछ लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह अमेरिका के नागरिक भारतवंशियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने देश (अमेरिका) के नागरिक कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने सांस्कृतिक देश की पहचान को सम्मान दिलाने वाले कार्य करें।

 

एक सवाल के उत्तर में उन्होंने स्वीकार किया कि केवल अमेरिकियों में ही नहीं बल्कि भारत में भी हमारे संगठन को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां हैं। हम अपने इस शताब्दी वर्ष में जन-जन के बीच पंच परिवर्तन के कार्यक्रमों को लेकर जा रहे हैं। यह केवल भारत या भारतीयों के लिए नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व में में स्वीकार किए जाने वाला विचार है। उन्होंने कहा कि भारत का दर्शन पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखता है। यही आध्यात्मिक विचारधारा हमारे सांस्कृतिक मूल्यों में विद्यमान है, जिसको आधार बनाकर रा.स्व.संघ अपने देश, समाज और राष्ट्र के साथ साथ सम्पूर्ण मानवता की भलाई के लिए जन जागरण का कार्य करने में लगा हुआ है और आगे भी यही कार्य करता रहेगा।

 

अमेरिका के प्रवास पर गए रा.स्व.संघ के सरकार्यवाह ने हडसन इंस्टीट्यूट की वार्ता में कहा कि जब हम अपनी पिछली 100 वर्ष की यात्रा को देखते हैं और समझते हैं कि हमारी शक्ति दिनों दिन बढ़ी ही है तो हमारे भीतर कोई अहंकार पैदा नहीं होता बल्कि विनम्रता का भाव पैदा होता है। हमारा यह विचार और मजबूत होता है कि हमें सच्ची मानवता की सेवा के लिए निरंतर कार्य करते जाना है। उन्होंने कहा कि 100 साल पहले कुछ बालकों को साथ लेकर शुरू किया गया संघ दैनंदिन चलने वाली अनूठी शाखा पद्धित के बल पर ही आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन बन पाया है।

 

उन्होंने वॉलिन्टियर और स्वयंसेवक के बीच का भेद स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी संगठन के वालिन्टियर कुछ घंटे के लिए कार्य करते हैं जिसके बदले उन्हें कुछ पैसा या सम्मान या प्रसिद्धि मिलती है, जबकि संघ के स्वयंसेवकों में उस एक घंटे की शाखा से हम ऐसे संस्कार पैदा करते हैं जिससे पहले ही दिन से उसके मन में समाज और राष्ट्र की निस्वार्थ भाव से सेवा का भाव जागृत होता है। वास्तव में स्वयंसेवक एक जीवन शैली है।

 

वॉल्टर रसेल मीड के एक सवाल के जवाब में संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि अमेरिकियों की केवल संघ के बारे में ही नहीं भारत के बारे में भी कुछ गलतफहमियां हैं। वे आज भी भारत को उसकी जनसंख्या, उसकी संस्कृति, उसके सामाजिक तौर तरीकों और व्यवहार के चलते गंदगी से भरा और सपेरों का देश मानते हैं। जबकि भारत का विचार और दर्शन पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने का महान विचार देने वाला है। भारत आज भी अपनी महान संस्कृति और विचारधारा के साथ आधुनिकता और विकास के मार्ग पर चलकर विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। चांद तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि भारत के बारे में, वहां के अल्पसंख्यकों के बारे में, भारत के पड़ोसी देशों से संबंधों के बारे में या वैश्विक जगत में भारत की भूमिका के बारे में हमारा स्पष्ट तौर पर मानना है कि निरंतर संवाद और लोगों से लोगों के बीच आपसी संबंधों से ही सारी भ्रांतियां दूर होंगी, समस्यांएं खत्म होंगी और सद्भाव का वातावरण बनेगा।

 

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