नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने रविवार को ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में सर्वोत्तम प्रथाओं’ पर आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) 2.0 के नए और संशोधित दिशानिर्देश जारी किए। यह पहल देश में बच्चों के स्वास्थ्य और समग्र विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मंत्रालय की ओर से बताया गया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पहले से लागू ‘4-डी मॉडल’ को और अधिक मजबूत बनाना है। इस मॉडल के तहत चार प्रमुख श्रेणियों जन्मजात दोष, रोग, कमियां, कुपोषण और विकासात्मक विलंब पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नए दिशा-निर्देशों में आधुनिक समय की स्वास्थ्य चुनौतियों को भी शामिल किया गया है। इनमें गैर-संक्रामक रोग, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और व्यवहार संबंधी विकार प्रमुख हैं। इस तरह कार्यक्रम अब पारंपरिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ-साथ बदलती जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों का भी समाधान करेगा।
संशोधित ढांचे में बच्चों के लिए निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक सेवाओं की एक व्यापक श्रृंखला को शामिल किया गया है। यह कार्यक्रम जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को कवर करता है और जीवनचक्र-आधारित दृष्टिकोण को और अधिक प्रभावी बनाता है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन दिशानिर्देशों के सफल क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय मिलकर कार्य करेंगे। साथ ही, स्कूलों व आंगनवाड़ी केंद्रों को स्क्रीनिंग और जागरूकता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
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