नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि देश के नवाचार तंत्र को अब केवल रिसर्च पेपर, पेटेंट और आईपीओ के आधार पर नहीं बल्कि उनके वास्तविक सामाजिक प्रभाव के आधार पर आंका जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि समय आ गया है जब शोध को सीधे उपयोगी उत्पादों और समाधान में बदलने पर फोकस किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि रिसर्च को ज़मीन पर उतारना ही असली पैमाना है।
प्रधान ने यह बात नई दिल्ली में स्थित भारत मंडपम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के पहले टेक्नोलॉजी समिट के उद्घाटन के दौरान कही। इस समिट का उद्देश्य उद्योग, अकादमिक जगत और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाकर विकसित भारत के लक्ष्य को गति देना है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में रिसर्च और इनोवेशन के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, इसके लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल करीब 70 प्रतिशत निवेश सरकार की ओर से आता है, लेकिन भविष्य में इसे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच 50:50 साझेदारी की दिशा में ले जाना चाहिए।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि आईआईटी सिस्टम देश में डीप-टेक इनोवेशन को बढ़ावा देने और रिसर्च को व्यावहारिक उपयोग में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह समिट आईआईटीएम से भारत के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ें थीम के तहत, शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच एक ज़बरदस्त तालमेल को दिखाता है। इसमें कार्डियोवैस्कुलर रिसर्च और रोबोटिक सर्जरी से लेकर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और बोधन एआई जैसी सॉवरेन एआई पहलों तक, कई प्रभावशाली क्षेत्रों में हुई प्रगति शामिल है।
उन्होंने बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे विश्व-स्तरीय इनोवेशन भारतीय संस्थानों में ही पनप सकता है। ऐसे सहयोगी मंच यह सुनिश्चित करते हैं कि रिसर्च को एक सही मकसद मिले, जबकि उद्योग उसे सही दिशा देता है। इस तरह, ये सभी मिलकर ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को आगे बढ़ाते हैं।
इस मौके पर आईआईटी मद्रास ने एनटीपीसी लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और एचएसबीसी के साथ साझेदारी की घोषणा की। इन सहयोगों के तहत हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रित रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
समिट के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में स्वास्थ्य, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में विकसित अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
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