विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय समझौते

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के बीच विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारत और नॉर्वे में कई द्विपक्षीय समझौते किए गए।

 

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए सोमवार को ओस्लो में नॉर्वे के प्रमुख अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संगठनों के साथ कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

 

इस अवसर पर

 

सीएसआईआर के महानिदेशक और डीएसआईआर के सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी के नेतृत्व में डीएसआईआर, सीएसआईआर की ओर से नॉर्वे के सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

 

इन समझौतों का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के विकास के क्षेत्रों में भारत-नॉर्वे संबंधों का विस्तार करना तथा इसके साथ दोनों देशों में संस्थागत साझेदारी, स्टार्टअप और उद्योग सहभागिता, शैक्षणिक सहयोग तथा सतत विकास संबंधी पहलों को बढ़ावा देना है।

 

सीएसआईआर और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद (आरसीएन) के बीच समझौता ज्ञापन का उद्देश्य अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार और क्षमता विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इस समझौते में जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा, महासागरों और स्वास्थ्य सहित वैश्विक चुनौतियों और सतत विकास लक्ष्यों से संबंधित क्षेत्रों में संयुक्त कार्यशालाओं, सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास परियोजनाओं, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान से जुड़ी यात्राओं, विशिष्ट कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की व्यवस्था और समय-समय पर उनकी समीक्षा के लिए तंत्र बनाने की परिकल्पना की गई है।

 

यह समझौता जैव-आधारित प्रक्रियाओं और सामग्रियों, नवाचार केंद्रों, समुद्री ऊर्जा (जिसमें अपतटीय पवन और हाइब्रिड प्रणालियां शामिल हैं), कार्बन कैप्चर, भंडारण और उपयोग तथा अपशिष्ट को काम में लाने योग्य सामग्रियों में परिवर्तित करने जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रमों के माध्यम से अपशिष्ट बनने से रोकने और दीर्घकालिक व्यवस्था में परिवर्तन पर केंद्रित है। इस परियोजना के लिए सीएसआईआर की ओर से लगभग 341 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। इस सहयोग में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, भूभौतिकीय सर्वेक्षण योजना, डेटा विश्लेषण और मॉडलिंग, तकनीकी परामर्श सहायता और वैज्ञानिक कार्यक्रमों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन शामिल होगा।

 

ये समझौते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत-नॉर्वे सहयोग में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इनसे दोनों देशों के बीच सहयोग से अनुसंधान, नवाचार-आधारित सतत विकास और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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