भारत-म्यांमार के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, संपर्क सुविधाओं के विस्तार पर बनी सहमति

नई दिल्ली : भारत और म्यांमार ने आर्थिक एवं सुरक्षा सहयोग तथा संपर्क सुविधाओं के विस्तार पर सहमति व्यक्त की है। आधारभूत परियोजनाओं को लागू करने तथा व्यापार एवं द्विपक्षीय सहयोग में बढ़ोतरी का भी फैसला किया गया है। इसके साथ ही पड़ोसी देश की ओर से आश्वासन दिया गया है कि भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ उसकी भूमि का उपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच सोमवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता हुई। चर्चा में व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, विकास सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

 

राष्ट्रपति ह्लाइंग 30 मई से 3 जून तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अप्रैल 2026 में पद संभालने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा है। मूल रूप से उन्हें ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ शिखर सम्मेलन में भाग लेना था, लेकिन सम्मेलन स्थगित होने के बाद इस अवसर का उपयोग द्विपक्षीय वार्ता के लिए किया गया। म्यांमार के राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इसमें पांच कैबिनेट मंत्री, तीन उपमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

 

वार्ता के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मंत्रालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि दोनों पक्षों ने लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण बताया। इसके तहत कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट को शीघ्र पूरा करने और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग के कालेवा-यागी खंड के जल्द निर्माण पर भी बल दिया गया।

 

सचिव के अनुसार भारत ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। वहीं म्यांमार के राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया कि म्यांमार की भूमि का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होगा।

 

उन्होंने कहा कि म्यांमार भारत का पड़ोसी देश है, जिसके साथ 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। यह भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’, ‘महासागर’ और इंडो-पैसिफिक नीतियों के केंद्र में स्थित है। दिल्ली आगमन से पहले म्यांमार के राष्ट्रपति ने बिहार के महाबोधि मंदिर, महाबोधि धम्मईखा मठ और सुजाता मंदिर का दौरा किया। यह यात्रा दोनों देशों के गहरे बौद्ध, धार्मिक और जन-जन के संबंधों को दर्शाती है।

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