New Delhi : पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हालात एक बार फिर बेहद विस्फोटक और बेकाबू हो चुके हैं। पाकिस्तान सरकार के खिलाफ स्थानीय नागरिकों का सुलग रहा गुस्सा आगामी 9 जून को एक बड़े और अनिश्चितकालीन जनांदोलन का रूप लेने जा रहा है। इस महाआंदोलन से बुरी तरह घबराई और बौखलाई पाकिस्तानी हुकूमत ने पूरे क्षेत्र में आज रात से अगले 7 दिनों के लिए मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। इसके साथ ही, स्थानीय जनता की आवाज को बंदूक की नोक पर दबाने के लिए पाकिस्तान इस अशांत इलाके में भारी संख्या में अतिरिक्त सुरक्षा बल और सेना की टुकड़ियां तैनात कर रहा है।
क्या है पूरा माजरा? ‘जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी’ ने दी हुंकार
दरअसल, पाकिस्तान के दमन और सौतेले व्यवहार के खिलाफ इस बड़े आंदोलन का आह्वान ‘जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी’ (JAAC) ने किया है। यह कमिटी PoJK के कई स्थानीय सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों का एक संयुक्त समूह है। JAAC का साफ तौर पर आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और स्थानीय कठपुतली प्रशासन दशकों से इस कब्जे वाले इलाके के नागरिकों के साथ गंभीर अन्याय और उनका आर्थिक शोषण कर रहा है। इसी हकमारी के विरोध में अब आर-पार की जंग का ऐलान किया गया है।
पाकिस्तान का वो ‘धोखा’, जिससे भड़की जनता की नाराजगी
इस ताजा तनाव और उकसावे के पीछे पाकिस्तान सरकार की वो फितरत है, जिसके तहत उसने पिछले साल अक्टूबर में हुए बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद आंदोलनकारियों से किया गया समझौता तोड़ दिया। उस वक्त घुटनों पर आई पाकिस्तानी सरकार, PoJK प्रशासन और JAAC के प्रतिनिधियों के बीच जनता की 32-सूत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए एक लिखित समझौता हुआ था। इस चार्टर में बिजली की दरों में भारी कटौती, आटे-गेहूं पर सरकारी सब्सिडी, पनबिजली की रॉयल्टी का स्थानीय जनता को भुगतान, पाकिस्तानी हुक्मरानों और वीआईपी लोगों को मिलने वाले खास विशेषाधिकारों को खत्म करना और गवर्नेंस में सुधार जैसे कई वादे शामिल थे। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान ने इनमें से एक भी अहम वादा पूरा नहीं किया, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
9 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल: अल्टीमेटम हुआ खत्म
बीते दिनों JAAC के शीर्ष नेताओं ने मीरपुर में एक आपातकालीन बैठक की थी और पाकिस्तानी अधिकारियों को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए 31 मई तक समझौते को पूरी तरह लागू करने की समय-सीमा तय की थी। समूह ने दो टूक चेतावनी दी थी कि अगर डेडलाइन के भीतर वादे पूरे नहीं हुए, तो पूरा PoK ठप कर दिया जाएगा। शौकत नवाज मीर के नेतृत्व में JAAC और पाकिस्तान की संघीय सरकार के बीच कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन हर बार की तरह वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही। समय-सीमा खत्म होने के बाद अब JAAC ने आगामी 9 जून से समूचे क्षेत्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल और पूर्ण बंदी शुरू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
इंटरनेट पर ताला और सेना की तैनाती: सहमी पाकिस्तानी हुकूमत
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, 9 जून के बंद और आंदोलन को पूरी तरह कुचलने के लिए पाकिस्तान सरकार ने दमनकारी नीतियां अपनानी शुरू कर दी हैं। आंदोलनकारी एक-दूसरे से संपर्क न कर सकें और दुनिया को PoK के भीतर की हकीकत पता न चले, इसलिए आज रात से ही 7 दिनों का डिजिटल ब्लैकआउट (इंटरनेट बैन) लागू किया जा रहा है। सड़कों पर भारी बख्तरबंद गाड़ियां और पाकिस्तानी रेंजर्स गश्त कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय नेताओं का कहना है कि वे अब पाकिस्तान की इन गीदड़ भभकियों और बंदूकों से डरने वाले नहीं हैं और अपना हक लेकर ही दम लेंगे।
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