अहमदाबाद एयर इंडिया हादसा : गुजरात के अहमदाबाद में पिछले साल 12 जून को हुए एयर इंडिया बोइंग 787 विमान हादसे की पहली बरसी पर भी अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार जारी है। अभी तक इस गंभीर दुर्घटना की पूरी जांच पूरी नहीं हो पाई है, क्योंकि विमान के इंजन समेत कई महत्वपूर्ण तकनीकी विश्लेषण अधूरे पड़े हैं। इन कारणों से रिपोर्ट में तीन महीने की और देरी हो सकती है।
इस हादसे के मुख्य कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। जांचकर्ता तय समय-सीमा से एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं।
बिजनेस न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) अपनी अंतिम रिपोर्ट को तय समय-सीमा (12 महीनों) के भीतर पूरा नहीं कर पाएगा। इसका मुख्य कारण यह है कि विमान के इंजन की जांच अमेरिका में चल रही है, जहां इस संबंध में कई महत्वपूर्ण परीक्षण अभी भी जारी हैं।
अधिकारियों ने कहा है कि इस सप्ताह AAIB एक स्टेटस रिपोर्ट जारी कर सकता है, जिसमें जांच की वर्तमान प्रगति और देरी के कारणों का विवरण होगा। अब यह उम्मीद है कि अंतिम रिपोर्ट अगले तीन महीनों के भीतर जारी होगी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हो रही जांच
इंजन की जांच में अमेरिका के राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB), बोइंग, और जीई एयरोस्पेस जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग लिया जा रहा है। इन संस्थानों के विशेषज्ञ विमान के इंजनों और उससे जुड़े सिस्टम का विश्लेषण कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इंजन की जांच अमेरिका में ही क्यों हो रही है, इसका कारण यह है कि पुर्जों को अलग करके उनका विश्लेषण करने के लिए विशिष्ट उपकरणों की आवश्यकता होती है, जो केवल वहां उपलब्ध हैं।
अंतिम रिपोर्ट में देरी के कारण
आधिकारिक नियम के अनुसार, विमान दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट 12 महीनों के भीतर प्रकाशित होनी चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो, तो संबंधित प्राधिकरणों को एक अंतरिम रिपोर्ट जारी करनी चाहिए, जिसमें जांच की प्रगति और लंबित मुद्दों का उल्लेख हो।
फ्यूल कंट्रोल स्विच का मामला
पिछले साल जारी एक प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया था कि उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ पर आ गए थे, जिससे ईंधन की आपूर्ति रुक गई और दोनों इंजन बंद हो गए।
कॉकपिट में मौजूद पायलटों के बीच हुई बातचीत से संकेत मिलता है कि वे इस बदलाव को लेकर भ्रमित थे। इससे यह सवाल उठता है कि यह गलती थी या कोई तकनीकी खराबी। जांचकर्ता अब विमान के रैम एयर टर्बाइन (RAT) के खुलने के समय पर भी ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि यह आपातकालीन प्रणाली बिजली जाने पर सक्रिय होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घटना के इलेक्ट्रिकल फेलियर का पता चल सकता है।
रिकॉर्डर की स्थिति और अन्य मुद्दे
जांच में एक बड़ी चुनौती विमान के रिकॉर्डर की खराब स्थिति है। आगे वाले फ्लाइट रिकॉर्डर का डेटा मिल चुका है, लेकिन पिछला रिकॉर्डर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है, और उससे डेटा प्राप्त करना कठिन हो रहा है।
इसके अतिरिक्त, जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दुर्घटना के बाद विमान का इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) क्यों सक्रिय नहीं हुआ। साथ ही, उड़ान से पहले विमान के कोर नेटवर्क सिस्टम में आई खराबी और किसी भी अन्य लंबित मेंटेनेंस से जुड़ी समस्या की भी समीक्षा की जा रही है।
बता दें कि यह दुर्घटना पिछले साल 12 जून को हुई थी, जब एयर इंडिया की लंदन जाने वाली फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद क्रैश हो गई। विमान ने एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर से टकराकर जमीन पर गिरा, जिसमें 241 यात्री और 19 लोग जमीन पर मारे गए। केवल एक व्यक्ति ही इस हादसे में जीवित बच पाया।
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