कोलकाता/तिरुवनंतपुरम : पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित ‘ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ सोलर घोटाले में महीनों से फरार चल रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और आरामबाग नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन स्वपन नंदी को आखिरकार पुलिस ने दबोच लिया है। कानून के लंबे हाथों से बचने के लिए स्वपन नंदी ने फिल्मी अंदाज में अपनी पहचान छिपाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन पुलिस की तकनीकी सर्विलांस के आगे उनकी चालाकी धरी की धरी रह गई। पुलिस ने उन्हें बंगाल से लगभग 2300 किलोमीटर दूर केरल से गिरफ्तार किया है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से बंगाल की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है।
मूंछ साफ कर बदला हुलिया, केरल को बनाया सेफ हाउस
जांच अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही ‘ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ में करोड़ों के गबन की जांच तेज हुई, स्वपन नंदी अचानक अंडरग्राउंड हो गए थे। पुलिस और जांच एजेंसियों को गच्चा देने के लिए उन्होंने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली। नंदी ने अपनी मूंछें मुंडवा लीं और पहनावा बदलकर सीधे दक्षिण भारत के राज्य केरल में जाकर छिप गए। उन्हें लग रहा था कि इतनी दूर वह पुलिस की नजरों से बचे रहेंगे। हालांकि, खुफिया इनपुट और मोबाइल लोकेशन की मदद से जांचकर्ताओं ने उन्हें केरल के ठिकाने से ढूंढ निकाला। पुलिस अब उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल लाने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है।
क्या था ‘ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ और कैसे हुआ महाघोटाला?
यह पूरा मामला आरामबाग नगर पालिका क्षेत्र के स्कूलों और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना से जुड़ा है। ‘ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत नगर पालिका ने तीन प्राथमिक विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और 11 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने के लिए ई-टेंडर (e-Tender) जारी किया था। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य करीब 764.46 किलोवाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करना था, ताकि स्कूलों की बिजली और स्ट्रीट लाइट की जरूरतों को पूरा किया जा सके। आरोप है कि इस नेक योजना की आड़ में स्वपन नंदी की सरपरस्ती में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया, टेंडर नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा कर दिया गया।
खुद TMC के ही नेता ने खोली थी भ्रष्टाचार की पोल
दिलचस्प बात यह है कि इस कथित घोटाले की लिखित शिकायत किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि खुद टीएमसी नेता समीर भंडारी ने की थी। स्वपन नंदी को चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद समीर भंडारी ने ही नगर पालिका की कमान संभाली थी। पद संभालते ही जब उन्होंने फाइलों की पड़ताल की, तो उन्हें इस सोलर प्रोजेक्ट में भारी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं मिलीं। इसके बाद उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की, जिसने पिछले कुछ महीनों में रफ्तार पकड़ी।
अब तक 3 आरोपी गिरफ्तार, आमने-सामने बिठाकर होगी पूछताछ
पुलिस के अनुसार, स्वपन नंदी की गिरफ्तारी से पहले इस महाघोटाले में तीन अन्य मुख्य किरदारों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में एक अस्थायी नगर अभियंता (Town Engineer), एक अस्थायी विद्युत पर्यवेक्षक (Electrical Supervisor) और टेंडर लेने वाला ठेकेदार शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन तीनों से रिमांड के दौरान मिली गोपनीय जानकारियों के आधार पर ही स्वपन नंदी तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ। अब पुलिस पूर्व चेयरमैन स्वपन नंदी को रिमांड पर लेकर सभी आरोपियों के साथ आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी, जिससे इस घोटाले में शामिल कुछ और बड़े सफेदपोशों के नामों का खुलासा होने की उम्मीद है।
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