सरकार विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए और कदम उठाएगी: सीतारमण

नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार देश में और विदेशी पूंजी लाने के लिए और कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि बॉन्ड मार्केट के लिए घोषित उपाय तो बस शुरुआत भर थे।

 

सीतारमण ने नई दिल्ली में ‘हीरो माइंडमाइन समिट 2026’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “हम मानते हैं कि हमें और विदेशी पूंजी की जरूरत है।” वित्त मंत्री ने कहा कि विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सरकार के घोषित उपाय महज शुरुआत हैं, जबकि अभी आगे और कदम उठाए जा सकते हैं।

 

‘हीरो माइंडमाइन समिट 2026’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों द्वारा किए गए निवेश पर ब्याज और पूंजीगत लाभ कर से छूट जैसे उपाय विदेशी पूंजी को वापस आकर्षित करने की दिशा में पहला कदम हैं। सीतारमण ने कहा, ‘‘यह कहानी का अंत नहीं है और कदम उठाए जाएंगे। हम मानते हैं कि हमें और अधिक विदेशी पूंजी की आवश्यकता है।’’

 

सीतारमण ने ‘माइंडमाइन समिट 2026’ में हीरो एंटरप्राइज़ के चेयरमैन सुनील कांत मुंजाल और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ लिमिटेड के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल के साथ एक अनौपचारिक बातचीत (फायरसाइड चैट) में हिस्सा लिया। इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्थिति हर सप्ताह बदल रही है और नई-नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसलिए देश को हर ऐसी आपात स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।

 

उन्होंने कहा कि आरबीआई द्वारा घोषित ढांचे के तहत मुद्रा जोखिम की लागत आरबीआई वहन करेगा, जिससे बैंक बिना बाधा अपने संसाधन जुटा सकेंगे। भारतीय अर्थव्यवस्था कच्चे माल, कच्चे तेल और उर्वरकों के आयात के कारण ‘‘गंभीर दबाव’’ का सामना कर रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि सक्रिय नीतियों और राज्यों की मजबूत भागीदारी की वजह से भारत का डेटा सेंटर और जीसीसी इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ रहा है, जो गतिविधियां पहले बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर तक ही सीमित थीं, वे अब तुमकुरु और मंगलुरु जैसे टियर-2 शहरों तक भी फैल रही हैं। इसका मतलब होगा ज़्यादा नौकरियां, बेहतर डेटा सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा।

 

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने 5 जून को बैंकों को तीन से पांच वर्ष की अवधि वाले विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) जमा के लिए अपनी मुद्रा अदला-बदली सुविधा का उपयोग करने की अनुमति दी थी, जिससे वे अमेरिकी यूएस डॉलर जमा को आरबीआई के साथ बदल सकें एवं मुद्रा जोखिम का प्रबंधन कर सकें।

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