नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संसद भवन में मुलाकात की। मुलाकात में उन्होंने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि तृणमूल से अलग होने की बात कहने वाले धड़े को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान स्पष्ट कहता है कि पार्टी की सदस्यता छोड़ने पर संसद की भी सदस्यता चली जाती है।
अभिषेक बनर्जी को इससे पहले 15 जून को लोकसभा अध्यक्ष से मिलना था। हालांकि कोलकाता में ईडी के समन के कारण मुलाकात संभव नहीं हो पाई। लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें आज 5 बजे मिलने का समय दिया था। मुलाकात के दौरान अभिषेक के साथ कल्याण बनर्जी, सौगत राय, महुआ मोइत्रा और डेरेक ऑ ब्रायन भी मौजूद थे।
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने बताया कि उन्होंने पार्टी से अलग होने की बात कहने वाले धड़े को मान्यता नहीं दिए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने इसके पक्ष में दो तर्क रखे। उन्होंने कहा कि पार्टी के अलग समूह बनाने वाले सदस्यों में से कुछ ने दूसरी पार्टी ज्वाइन की है। ऐसे में वे तृणमूल कांग्रेस के सदस्य नहीं रहे। इस कारण से तत्काल उनकी लोकसभा सदस्यता चली जानी चाहिए। दूसरा संविधान में स्पष्ट है कि दो तिहाई राजनीतिक दल खुद को अलग करने का फैसला कर सकता है ना कि दो तिहाई विधायी दल।
अभिषेक बनर्जी ने इस दौरान सत्ता पक्ष पर धन और बल के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान को बदलने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति की जा रही है। सीबीआई, ईडी और सीआईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके पास सबूत है कि सांसदों को पैसा दिया गया है और कुछ को धमकाया गया है। बंगाल में ही नहीं महाराष्ट्र में भी यही किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पार्टी से अलग जाने वाले नेताओं पर धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने संविधान का अनादर किया है। बंगाल की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
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