कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक संकट के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड विमान से दिल्ली यात्रा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक कुणाल घोष तथा विद्रोही नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।
शुक्रवार को अभिषेक बनर्जी लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के लिए दिल्ली गए। इस दौरान उनके चार्टर्ड विमान के उपयोग को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा तेज हो गई। तृणमूल के कई नेता और कार्यकर्ता जहां विभिन्न मामलों में गिरफ्तारी, कानूनी चुनौतियों और राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं, वहीं अभिषेक की निजी विमान यात्राओं को लेकर असंतोष की आवाजें सामने आने लगी हैं।
कुणाल घोष ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि अभिषेक चार्टर्ड विमान से गए हैं या नहीं, लेकिन यदि ऐसी यात्रा पार्टी के धन से की गई है तो वह इसका समर्थन नहीं करते। उन्होंने संकेत दिया कि वर्तमान परिस्थितियों में पार्टी संसाधनों के उपयोग को लेकर जवाबदेही जरूरी है।
दूसरी ओर, विद्रोही खेमे के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय लंबे समय से पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली और खर्चों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हाल के दिनों में विद्रोही गुट में शामिल सांसद शताब्दी राय ने भी अभिषेक की जीवनशैली और विलासिता पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की थी।
जानकारी के अनुसार, पिछले कई वर्षों से अभिषेक बनर्जी एक निजी विमानन कंपनी के चार्टर्ड जेट और हेलीकॉप्टर का उपयोग करते रहे हैं। निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराए गए विवरण के मुताबिक, वर्ष 2023 में मेघालय विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान इस विमान सेवा पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार में तृणमूल कांग्रेस ने विमान और हेलीकॉप्टर सेवाओं पर 46 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए थे।
सूत्रों के अनुसार, 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी अभिषेक ने इसी कंपनी के विमान और हेलीकॉप्टर का उपयोग किया था। बताया जाता है कि चुनावी अवधि के अलावा भी वह समय-समय पर इसी सेवा का इस्तेमाल करते हैं।
विमानन क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जिस मॉडल के निजी जेट का उपयोग किया जाता है, उसका किराया सामान्यतः प्रति उड़ान घंटा चार से पांच लाख रुपये तक होता है। इसके अतिरिक्त विमान के इंतजार, पार्किंग, हैंगर तथा अन्य परिचालन खर्च अलग से जोड़े जाते हैं। ऐसे में कोलकाता-दिल्ली-कोलकाता की एक यात्रा पर ही कई लाख रुपये खर्च होने की संभावना रहती है।
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