अयोध्या : अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान की गई कीमती वस्तुओं के कथित गायब होने का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में रोजाना नई और चौंकाने वाली परतें खुल रही हैं। अब मंदिर को दान में दी गई 60 किलो चांदी की ईंटों और प्राण प्रतिष्ठा के समय जलाई गई अखंड ज्योति के बेस (चांदी के दीपक) का भी कोई अता-पता नहीं मिल रहा है।
इस गंभीर मामले को लेकर ‘इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन’ (IBJA) ने मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। इस खुलासे के बाद राम मंदिर निर्माण के समय देश-विदेश से भारी आस्था के साथ दान देने वाले श्रद्धालु अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक दान में दी गई बहुमूल्य वस्तुओं का सार्वजनिक हिसाब मांग रहे हैं।
सराफा कारोबारियों ने जुटाई थी 60 किलो चांदी, नाम-गोत्र लिखकर सौंपी थीं ईंटें
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने इस पूरे विवाद का पर्दाफाश करते हुए कई गंभीर तथ्य सामने रखे हैं। उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण की घोषणा के बाद देश भर के छोटे-बड़े सराफा कारोबारियों ने अपनी अटूट श्रद्धा दिखाते हुए 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी का योगदान देकर करीब 60 किलो चांदी एकत्र की थी।
इसके बाद इस पूरी चांदी को एक साथ गलाकर एक से सवा किलो वजन की खूबसूरत ईंटें तैयार की गई थीं। इन सभी ईंटों पर बाकायदा दान देने वाले श्रद्धालुओं के नाम और उनके गोत्र भी अंकित किए गए थे। इसके अलावा ऋषिकेश एसोसिएशन की ओर से भी प्रभु श्री राम के चरणों में एक किलो शुद्ध चांदी का कलश भेंट किया गया था।
रसीद भी है मौजूद, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा की मौजूदगी में सौंपा था दान
अनुराग रस्तोगी के मुताबिक, यह कोई मौखिक दान नहीं था, बल्कि इसके पुख्ता लिखित दस्तावेज मौजूद हैं। 20 जुलाई 2020 को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की लिखित सहमति मिलने के बाद इन सभी चांदी की ईंटों को अयोध्या स्थित रामकचहरी में जाकर विधिवत सौंपा गया था।
जिस वक्त यह कीमती चढ़ावा सौंपा गया, उस समय मौके पर खुद ट्रस्ट के चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और मुख्य कैशियर प्रकाश गुप्ता मौजूद थे। दान सामग्री को बहीखाते में दर्ज कर स्वीकार करने के बाद ट्रस्ट की ओर से बकायदा शुद्धता प्रमाण पत्र और आधिकारिक रसीद भी जारी की गई थी। सराफा एसोसिएशन ने उस समय अनुरोध किया था कि इन ईंटों को राम मंदिर के नींव पूजन (शिलान्यास) में उपयोग किया जाए, लेकिन मंदिर बनने के बाद इन ईंटों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
प्राण प्रतिष्ठा की तस्वीरों में दिखा चांदी का दीपक और नाग-नागिन का जोड़ा अब गायब?
एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड रस्तोगी ने एक और बड़ा और हैरान करने वाला दावा किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भी भगवान के लिए एक-एक किलो वजन के दो चांदी के दीपक, दो बड़े चांदी के कटोरे, 200 ग्राम की पंचधातु सिल्ली और नाग-नागिन का एक पवित्र जोड़ा दान किया था।
रस्तोगी के मुताबिक, उनके द्वारा दान किए गए एक दीपक में खुद डॉ. अनिल मिश्रा और उनकी धर्मपत्नी ने मिलकर रामलला की मुख्य अखंड ज्योति जलाई थी, जो प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान देश-विदेश के टीवी चैनलों और आधिकारिक तस्वीरों में भी साफ तौर पर दिखाई दी थी। लेकिन अब जब भव्य मंदिर बनकर तैयार हो चुका है और आम श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं, तो गर्भगृह से न तो वह ऐतिहासिक चांदी का दीपक दिखाई दे रहा है और न ही भगवान के राजभोग के लिए दान किए गए चांदी के कटोरे। रस्तोगी ने मांग की है कि ट्रस्ट इन सभी दान की गई सामग्रियों का पूरा ऑडिट ब्यौरा तुरंत सार्वजनिक करे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
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